मन्दिर सरकारीकरणके दुष्परिणाम, तिरुपति मन्दिरको १६वीं शताब्दीके शासककी ओरसे दिए गए आभूषण लुप्त !
‘केन्द्रीय सूचना आयुक्त’ने (सीआईसी) प्रश्न किया है कि विजयवाडाके १६वीं शताब्दी के शासक कृष्णदेव रायद्वारा तिरुपतिमें भगवान वेंकटेश्वरके मन्दिरको दानमें दिए गए आभूषण कहां हैं ? ‘केन्द्रीय सूचना आयुक्त’ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई), संस्कृति मन्त्रालय, आन्ध्र प्रदेश शासन और ‘तिरुमला तिरुपति देवस्थानम’से यह प्रश्न किया है !
अति प्राचीन सुप्रसिद्ध एवं समृद्ध देवस्थानोंका सरकारीकरण कर, वहां योग्य लोगोंको पदासीन करनेका दुष्परिणाम तो एक दिवस यही होना था !
कहां देवालयोंको धन एवं देवताओंको आभूषण दान करनेवाले, उसका निर्माण एवं संरक्षण करनेवाले धर्मप्रिय राजा और कहां इस निधर्मी लोकतन्त्रमें मन्दिरोंका सरकारीकरण उसके संरक्षक पदपर भ्रष्ट और निधर्मी लोगोंको आसीन कर उसके धनको लूटनेवाले, उसका अपव्यय करनेवाले, उससे अहिन्दुओंका पोषण करनेवाले एवं विकासके नामपर देवालयोंका विध्वंस करनेवाले, आजके निधर्मी राज्यकर्ता ! इस स्थितिको परिवर्तित करने हेतु हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना करना अपरिहार्य हो गया है ।
राज्यकर्ताओ ! देवकृपासे शासन प्राप्त होता है, भक्तोंद्वारा उसके धनका अपव्यय करनेसे या उसे लूटनेसे सत्ताका नाश तो होता है, इससे अक्षम्य पापकर्म भी निर्माण होता है, जिसका फल इस जन्म या अगले जन्म भोगना ही पडता है और इसे भोगना मृत्युसे भी अधिक कष्टप्रद होता है ! – तनुजा ठाकुर (३.९.२०१८)
Leave a Reply