सितम्बर २, २०१८
झारखण्डसे आदिवासी बच्चोंको पंजाब ले जाकर धर्म परिवर्तन कर ईसाई बनानेका प्रकरण उजागर हुआ है । राज्य से ३४ बच्चोंको लुधियानाके एक अवैध आश्रय सदनमें रखे जानेकी सूचनापर मारे गए छापेमें ४ बच्चों मिले हैं, २ लोगोंको बन्दी बनाया गया ! शेष बच्चोंमें से २० झारखण्डके पश्चिमी सिंहभूममें अपने घरोंपर लौट आए हैं; लेकिन १० बच्चे अब भी लुप्त हैं !
पश्चिमी सिंहभूमके पुलिस अधीक्षक जी. क्रान्ति कुमारने रविवारको बताया कि लुधियानामें ३ कक्षोंके आश्रय सदनसे मिले बच्चोंके वहां पढाईके लिए रहनेकी बात कही जा रही है । पकडे गए लोगोंमें बिहारके गयाका सत्येन्द्र प्रसाद मोसेस (५६ वर्ष) और पश्चिमी सिंहभूमके गुदडी पुलिस थानाक्षेत्रका निवासी जूनुल लांगो सम्मिलित हैं । सत्येन्द्र इस आश्रय सदनका मालिक भी है ।
उन्होंने बताया कि प्रबन्धनने ३० बच्चोंको वापस उनके घरोंपर भेज देनेका दावा किया, जिनमें से पश्चिमी सिंहभूममें फिजिकल सत्यापनकेद्वारा २० बच्चोंके घर पहुंचनेकी पुष्टि भी कर ली गई है; लेकिन १० बच्चे अब भी लुप्त हैं । उन्होंने बताया कि शनिवारको दोनों आरोपियोंको न्यायालयने १४ दिवसोंके लिए न्यायिक हिरासतमें भेज दिया है ।
रांची पुलिसके विशेष विभागने ३४ बच्चोंको लुधियानाके आश्रय सदनमें ईसाई बनानेके लिए रखे जानेका विवरण दिया था । इसके पश्चात ‘एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट’ पुलिस थानाके अधिकारी बनारसी रामको इन बच्चोंको लानेके लिए पंजाब भेजा गया था ।
चाईबासाकी बाल कल्याण समितिकी सदस्या ज्योत्सना टिर्कीने २६ अगस्तको एक ब्यौरेके आधारपर प्राथमिकी प्रविष्ट कराई थी, जिसमें लुधियानाके आश्रय सदनमें बच्चोंका धर्म परिवर्तन कर उन्हें ईसाई बनाने और बाल श्रममें सम्मिलित करानेका आरोप लगाया गया था । ज्योत्सनाने अपनी परिवादमें जूनुल लांगोपर बच्चोंके अभिभावकोंको उन्हें शिक्षा और दिलानेका झूठा वचन देकर लुभानेका भी आरोप ‘एफआईआर’में लगाया था ।
नगरके थाना सदरके एएसआई परमजीत सिंहने बताया कि धर्म परिवर्तनकी परिवाद मिलनेके पश्चात झारखण्ड पुलिस गत दिवस लुधियाना आई थी । वह यहां से सत्येन्द्र प्रसाद नामक व्यक्तिको ले गई । हम अपने स्तरपर प्रकरणकी जांच कर रहे हैं ।
“इन विधर्मियों और राष्ट्र द्रोहियोंका दुस्साहस देखिए, अपने तथाकथित धर्मकी जनसंख्या बढानेके लिए ये लोग नीचतापूर्ण कार्य करने से भी पीछे नहीं हटते ! हिन्दू राष्ट्रमें इनका विनाश निश्चित है” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : अमर उजाला
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