सितम्बर २, २०१८
भाजपाके दो सांसदोंने महिलाओंद्वारा विधानके (कानूनके) दुरुपयोगकेद्वारा पुरुषोंकी प्रताडना से सम्बन्धित परिवादपर सुनवाईके लिए एक आयोगके गठनकी मांग की है । इसे लेकर राष्ट्रीय महिला आयोगकी (एनसीडब्ल्यू) अध्यक्ष रेखा शर्माने शनिवारको कहा कि हर किसीको अपनी मांग रखनेका अधिकार है; लेकिन मुझे नहीं लगता कि पुरुष आयोगकी कोई आवश्यकता है ।
उत्तर प्रदेशके घोसी और हरदोईसे भारतीय जनता पार्टीके लोकसभा सदस्यों हरिनारायण राजभर और अंशुल वर्माने कहा कि वह ‘पुरुष आयोग’के लिए समर्थनके लक्ष्यके साथ २३ सितम्बरको दिल्लीमें एक कार्यक्रमको सम्बोधित करेंगे । दोनों सांसदोंने कहा कि उन्होंने संसदमें भी इस प्रकरणको उठाया है ।
राजभरने कहा, ‘पुरुष भी पत्नियोंकी प्रताडनाके शिकार होते हैं । न्यायालयमें इस प्रकारके कई प्रकरण लम्बित हैं । महिलाओंको न्याय दिलानेके लिए विधान और मंच उपलब्ध हैं; लेकिन पुरुषोंकी समस्याओंपर अब तक ध्यान नहीं दिया गया है । ‘एनसीडब्ल्यू’की भांति पुरूषोंके लिए भी आयोगकी आवश्यकता है ।’
उन्होंने कहा, “मैं यह नहीं कह रहा हूं कि प्रत्येक महिला या प्रत्येक पुरुष गलत होता है; लेकिन दोनों ही लिंगोंमें ऐसे लोग हैं, जो दूसरे पर अत्याचार करते हैं; इसलिए पुरुषोंसे सम्बन्धित समस्याओंको सुलझानेके लिए भी एक ‘मंच’ होना चाहिए । मैंने संसदमें भी इस प्रकरणको उठाया है ।”
राजभरने कहा कि पुरुषोंके लिए राष्ट्रीय आयोगकी मांग योग्य है । वर्माने कहा कि उन्होंने शनिवारको संसदकी एक स्थायी समितिके समक्ष इस प्रकरणको रखा है, जिसके वह भी एक सदस्य हैं । सांसदने कहा कि भारतीय दण्ड संहिताकी धारा ४९८ ए के दुरुपयोगको रोकनेके लिए उसमें संशोधनकी आवश्यकता है ।
यह धारा पति और उसके परिजनोंद्वारा दहेजके लिए महिलाओंको परेशान किए जाने सहित उनके साथ होने वाले किसी भी तरह के अत्याचार के रोकथाम से संबंधित है. उन्होंने दावा किया कि 498 ए पुरुषों को परेशान करने का एक हथियार बन गया है.
स्रोत : न्यूज 18 हिन्दी
Leave a Reply