‘एमबीए’का छात्र हारुन अब्बास बना आतंकी, बन्दूक थामे हुए चित्र ‘फेसबुक’पर डाला !


सितम्बर ४, २०१८

घाटीमें बन्दूक थामने वाले एमबीए छात्र हारुन अब्बास वानीके कुटुम्बने घर वापसीकी मार्मिक याचना की है । जम्मू-कश्मीर स्थित डोडा प्रान्तके रहने वाला हारुन १ सितम्बरको आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीनमें सम्मिलित हुआ था । उसने एके-४७ के साथ लिए गए चित्र सामाजिक प्रसार माध्यमोंपर प्रेषित कर आतंकी बननेकी घोषणा की थी । एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारीने मंगलवारको बताया कि एके-४७ के साथ चित्र आनेके पश्चात परिजनोंको पुत्रका आतंकवादी संगठनमें सम्मिलित होनेकी सूचना मिली । उन्होंने उससे हिंसाको त्याग घर आनेकी विनती की है ।

हारुनके पिता गुलाम अब्बास वानी और मां शमीमा बेगमने उससे घर आनेकी विनती की है । शमीमाने वीडियो सन्देशमें कहा, तुमने समूचे कुटुम्बको विकट परिस्थितिमें डाल दिया है । मैं कई रोगों से ग्रस्त हूं, ऐसेमें हम कैसे जीवित रहें !

हारुनके चाचा फारुक अहमद वानीने कहा, “वह विपणिमें थे, तभी किसी परिजनने चित्रको ‘व्हाट्सएप’पर भेजकर जानकारी मांगी । चित्र देख कर मैं चौंक गया और इस प्रकार हमें हारुनके आतंकी बननेकी सूचना मिली । उन्होंने कहा, वह अधिकतर समय बाहर रहता था; इसलिए ज्ञात नहीं किसके सम्पर्कमें आनेके पश्चात उसने यह पग उठाया; लेकिन हारुनकी मां और पूरा गांव चाहता है कि वह हिंसाका मार्ग छोड़ अपने भविष्यको संवारे ।

चाचीने एक वीडियो सन्देशमें कहा कि वास्तविक जेहाद बुजुर्ग मां-बापकी सेवा है । हम तुम्हारे कृत्य से लज्जित है । तुम्हारे मां-बाप रुग्ण पड गए हैं और उन्हें तुम्हारी आवश्यकता है । उन्होंने कहा, जेहादकी कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि हम प्रसन्न है ।
मां शमीमाने बताया कि हारुन पढनेमें बहुत अच्छा है और श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय से अच्छे अंकोंके साथ एमबीएकी शिक्षा की है । यह करनेके टश्ऊचाउ उसके पास नौकरीके कई प्रस्ताव आए थे ।  
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारीने कहा कि पुलिस पूरे प्रकरणकी जांच कर रही है । वह ज्ञात करनेका  प्रयास कर रही है कि हारुन आतंकी संगठन शमें शामिल हुआ है या नहीं ?

सेनाने हारुनसे हिंसा छोडनेकी विनती की है । ‘डेल्टा फोर्स’के जनरल अफसर कमांडिंग मेजर जनरल राजीव ननवदाने कहा, सोमवारको हमें हारुनके आतंकी संगठनमें सम्मिलित होनेकी सूचना मिली । मैं आशा करता हूं कि उसे सद्बुद्धि आएगी और वह मुख्यधारामें लौट आएगा । उन्होंने कहा, यदि वह लौटता है तो हम उसकी सहायता करेंगे । हम उसका मार्गदर्शन करेंगे; लेकिन राह तो उसे स्वयं ही अपने लिए चुनना होगा ।

“देशका बहुमूल्य पैसा इनकी शिक्षापर व्यय होता है और शासकीय कोषको लूटकर, ये शासनके विरुद्ध खडे होकर आतंकी बन जाते हैं तो शासन इन सुविधाओंको हटाता क्यों नही ?” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : लाइव हिन्दुस्तान



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