सितम्बर ५, २०१८
शिक्षक दिवसके अवसरपर बुधवारको लोक भवनमें आयोजित राज्य अध्यापक पुरस्कार समारोहमें राज्यपाल राम नाईक और मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथने ३४ अध्यापकोंको सम्मानित किया । इस अवसरपर मुख्यमन्त्रीने अध्यापकोंको परामर्श दिए । उन्होंने शिक्षकोंसे यह विनती भी की कि वे अपने बच्चोंको भी वहीं पढाएं, जहां स्वयं पढाते हैं ।
समारोहमें उप मुख्यमन्त्री डॉ. दिनेश शर्मा और राज्यमन्त्री अनुपमा जायसवाल व संदीप सिंहके अतिरिक्त कैबिनेट मंत्री सूर्य प्रताप शाही व सुरेश राणा भी उपस्थित रहे । अपने सम्बोधनमें योगी आदित्यनाथने कहा कि देशमें बहुत कम ही लोग होते हैं, जो समाजके लिए कार्य करनेको सज्ज होते हैं । आज हमारे पीछे एक साथ शिक्षित बेरोजगारोंकी लम्बी चौडी फौज खडी है ! गत दिवसोंमें शासनने पुलिसमें सिपाहीके ४२००० और प्राथमिक शिक्षामें अध्यापकोंके ६८५०० पदोंपर भर्ती निकाली थी, जिसमें सिपाहीके पदोंके लिए २२ लाख और अध्यापकके पदोंके लिए १०५००० आवेदन आए !
प्राथमिक अध्यापक पदके लिए मात्र ४१५५६ परीक्षार्थियोंने ही परीक्षा पास की । आज प्रदेशमें प्राथमिक शिक्षाके ९०००० पद रिक्त हैं; लेकिन हम देख रहे हैं लोग सिर मुण्डवा रहे हैं, वह लोग इस योग्य हैं कि नहीं कि वे इन शिक्षकके पदको ग्रहण कर सकें ! वह चाहते हैं कि बिना किसी प्रतियोगिताके उन्हें बच्चोंका भविष्य बनानेके लिए शिक्षककी पदवी दे दी जाए !
प्रथम बार देशमें उच्च विद्यालय और इण्टरमीडिएटके परिणाम एक साथ आ गए, जो कि बिल्कुल नकलविहीन प्रकार से परीक्षा सम्पन्न कराई गई थी । प्रदेशमें पहले भी परीक्षाएं होती थी; लेकिन वह ठेकेदारी प्रथासे होती थी । जब हमने यह जांच कराई कि १५ लाख विद्यार्थियोंने परीक्षा छोडी है, वह कौन है ?, तो पता चला कि यह वही मुन्ना भाई थे, जो ठेकेदारी प्रथासे परीक्षाको पास करते थे !
प्रदेशको अभिभावकके रूपमें राज्यपाल राम नाईक मिले हुए हैं । शिक्षकोंको कभी भी किसी नेताके पीछे नहीं भागना चाहिए । शिक्षक जिस विद्यालयमें पढाते हैं, वही अपने बच्चोंको भी पढाना चाहिए । जब हम विद्यालय जाते थे तो स्वयं स्वच्छता करते थे और शेष व्यवस्था भी किया करते थे । आजका पढा लिखा हुआ युवा सबसे असहाय दिखता है । शिक्षकोंको अभिभावकों से समय-समयपर भी अवश्य मिलना चाहिए, ताकि शिक्षक और अभिभावकोंमें सम्पर्क बना रहे ।
“आजके तथाकथित शिक्षकोंको धनके अतिरिक्त कुछ दिखाई नहीं देता । वस्तुत: ये शिक्षक कहलाने योग्य ही नहीं है और इन्हें ही बालकोंका भविष्य नष्ट करने हेतु नियुक्त किया जाता है !” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : लाइव हिन्दुस्तान
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