सितम्बर ५, २०१८
जम्मू कश्मीरकी पूर्व मुख्यमन्त्री महबूबा मुफ्तीने चेतावनी दी है कि यदि धारा ३७० और ३५ए हटाया गया तो अच्छा नहीं होगा ! उन्होंने कहा दी है कि ऐसी स्थितिमें भारत से जम्मू कश्मीर सम्बन्ध समाप्त कर लेगा । पूर्व मुख्यमन्त्रीने कहा कि ३७० और ३५ए राज्यकी एक अलग पहचान है, जिसे प्रत्येक स्थितिमें बचाए रखा जाएगा । मुख्यमन्त्री पद खोनेके पश्चात प्रथम बार राजौरीके भ्रमणपर आई पीडीपी अध्यक्षाने कहा कि राज्यकी स्थिति सामान्य करनेके लिए प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदीको अटल बिहारी वाजपेयी बनना पडेगा, जिसके लिए पाकिस्तान से बात करना आवश्यक है ।
दक्षिण एशियामें शान्तिके लिए भारत एवं पाकिस्तानके मध्य संवाद करनेको ‘अनिवार्य’ बताते हुए जम्मू कश्मीरकी पूर्व मुख्यमन्त्री महबूबा मुफ्तीने मंगलवारको कहा कि कश्मीरके लिए प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदीको पाकिस्तानमें अपने समकक्ष इमरान खानकी ओर मित्रताका हाथ बढाना चाहिए ।
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) अध्यक्षाने यह भी कहा कि दोनों पडोसी देशोंके मध्य शान्तिकी प्रक्रिया करनेके लिए प्रधानमन्त्रीको दिवंगत प्रधानमन्त्री अटल बिहारी वाजपेयीके पगपर चलना चहिए ।
राजौरीमें एक जनसभाको सम्बोधित करते हुए पीडीपी अध्यक्षाने कहा, ‘दक्षिण एशियामें शान्ति केवल तभी सम्भव है, जब जम्मू कश्मीरमें शान्ति सुनिश्चित होगी !’
ज्ञात हो कि संविधानके अनुच्छेद ३५ ए से सम्बन्धित सुनवाईके समय राज्य शासनके अधिवक्ताकी ओर से न्यायालयमें की गई टिप्पणीकी जम्मू कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टीने (पीडीपी) कडी निंदा की । दलने कहा कि राज्यपाल एसपी मलिक यह सुनिश्चित करें कि प्रदेश निष्पक्षता और सशक्त अपना पक्ष रखे !
पीडीपीके मुख्य प्रवक्ता रफी अहमद मीरने एक वक्तव्यमें कहा, ‘पीडीपी बार-बार जम्मू कश्मीरको प्राप्त संवैधानिक शक्तियोंको बनाए रखने तथा इसे और सशक्त बनानेकी बात कहती रही है । इस प्रकरणमें राज्यके अधिवक्ताने जो टिप्पणी की है, हम उसकी कडी निन्दा करते हैं !’
एएसजी तुषार मेहता उच्चतम न्यायालयमें जम्मू कश्मीरका पक्ष रख रहे हैं । गत सप्ताह न्यायालयमें मेहताने जो रवैया अपनाया था, मीर उसपर प्रतिक्रिया दे रहे थे । सुनवाईके समय, अनुच्छेद ३५ ए और कुछ अन्य बातोंपर चर्चाकी आवश्यकतासे सहमति जताते हुए एएसजीने कहा, “इस बातको नकारा नहीं जा सकता है कि इसमें (‘अनुच्छेद ३५ ए’में) लैंगिक भेदभावका पहलू सम्मिलित है ।”
‘अनुच्छेद ३५ ए’को १९५४ में राष्ट्रपतिके आदेशसे (प्रेसीडेंशियल आर्डर) संविधानमें सम्मिलित किया गया था । इसके अन्तर्गत जम्मू कश्मीरके नागरिकोंको कुछ विशेष अधिकार प्राप्त हैं । इस अनुच्छेदमें की गई व्यवस्थाके अनुसार राज्यके बाहरका कोई भी व्यक्ति प्रदेशमें अचल सम्पत्ति नहीं क्रय कर सकता है ।
स्रोत : जी न्यूज
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