कुछ ज्ञानमार्गी मुझसे कहते हैं कि वे ‘सोऽहं’ भावमें अधिक समय नहीं रह पाते हैं । ‘सोऽहं’ भाव या ‘अहम् ब्रह्म अस्मि’के भावमें अधिक समय रहने हेतु हमारा आध्यात्मिक स्तर ‘कमसे कम’ ७० % प्रतिशतसे अधिक होना अनिवार्य है, अन्यथा ‘सोऽहं’ भाव श्मशानी वैराग्य समान ही रहनेवाला है; अतः ज्ञानमार्गियोंने अपने आध्यत्मिक स्तरको बढानेका प्रयास करें; क्योंकि माध्यमिक कक्षाके विद्यार्थी, महाविद्यालयीन स्तरके गणितके प्रश्नको हल नहीं कर सकता, यह एक कटु सत्य है, इसे स्वीकार कर अपने सामर्थ्यको बढाने हेतु योग्य साधना करें ! – तनुजा ठाकुर
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