सितम्बर ३, २०१८
माओवादी गत २० वर्षोमें १२ सहस्त्र निर्दोष भारतीयोंकी हत्या कर चुके हैं । ९३०० लोगोंको तो इन माओवादियोंने पुलिसका मुखबिर बताकर मार डाला है । फिर भी न्यायालयसे लेकर पत्रकारतक, एकेडमियासे लेकर कांग्रेसतक, इसके गुण गा रहे हैं !
गृह मन्त्रालयने नक्सलियोंके कृत्योंका जो काला चिट्ठा खोला है, उससे भी इन नक्सली समर्थकोंकी आंखें नहीं खुल रही हैं । अपने निहित स्वार्थमें अन्धे शहरी नक्सली समर्थक मोदी शासनको कोसनेमें लगे हैं । नक्सली गत २० वर्षोमें १२ सहस्त्र निर्दोष लोगोंकी हत्या कर चुके हैं । ९३०० लोगोंकी तो इन नक्सलियों पुलिसका मुखबिर बताकर प्राण ले लिए है । इसके अतिरिक्त लगभग २७०० पुलिस तथा सुरक्षाबलके जवानोंके प्राण ले चुके हैं । यदि नक्सलियोंपर प्रतिबन्ध लगानेमें कोई शासन सफल हुआ है तो वह मोदी शासन ही है ।
मुख्य बिन्दू
* नक्सलियोंने ९३०० लोगोंको तो पुलिस मुखबिर बताकर मार चूकें हैं ।
* मोदी शासनकी विकासपरक योजना चलाने और कडाईके कारण नक्सली हिंसामें आई है कमी
गत दो दशक में नक्सली आक्रमणोंने १२ सहस्त्र लोगोंके प्राण ले लिए है, इसमें २७०० सुरक्षाकर्मी भी सम्मिलित हैं । गृह मन्त्रालयद्वारा जारी विवरणपर ध्यान करें तो जिन लोगोंके प्राण गए हैं उनमें ९३०० ऐसे निर्दोष लोग सम्मिलित हैं, जिनकी या तो नक्सलियोंने पुलिसका मुखबिर बताकर हत्या कर दी या सुरक्षा बलों और नक्सलियोंके मध्य की गोलीबारीमें मारे गए ! यद्यपि सुरक्षा बलोंके विरुद्ध आक्रमणोंके पश्चात भी गत तीन वर्षोमें माओवादी हिंसामें लगभग पचीस प्रतिशतकी कमी देखी गई है । गृहमन्त्रालयके अधिकारीसे मिली सूचनाके अनुसार मई २०११ से लेकर २०१४ के अप्रैलतककी तुलनामें मई २०१४ से अप्रैल २०१७ तक माओवादी हिंसामें २५ प्रतिशतकी कमी आई है । वहीं सुरक्षा बलोंके हताहत होने वाली संख्यामें ४२ प्रतिशत अल्प हुई है ।
यूपीए शासनके कार्यकालके समय वर्ष २०१० के अप्रैलमें छत्तीसगढके दन्तेवाडामें नक्सलियोंने घात लगाकर ‘सीआरपीएफ’के ७६ जवानोंकी हत्या कर दी थी । इससे स्पष्ट होता है कि यूपीए शासनके कार्यकालके समय नक्सली कितने निरंकुश हो गए थे ! लेकिन २०१४ में जब से मोदी शासन केन्द्रकी सत्तामें आया है, माओवादी हिंसामें कमी आई है । गृहमन्त्रालयके अधिकारीका कहना है कि नक्सलको समाप्त करनेकी दरमें ६५ प्रतिशत वृद्धि हुई है । इसके अतिरिक्त चरमपन्थियोंके आत्मसमर्पण करनेकी दरमें १८५ प्रतिशतकी वृद्धि हुई ! लगता है कि मोदी शासनकी नक्सलियोंके सन्दर्भमें मिल रही सफलताके कारण ही नक्सलियोंने नवीन षडयन्त्र किया है ।
मोदी शासनने माओवादियोंकी बृहत गतिविधियोंपर अंकुश लगानेके लिए राष्ट्रीय नीति और क्रियान्वयन योजनाएं आरम्भ की । इस योजनाके अन्तर्गत सुरक्षा, विकास तथा स्थानीय समुदायोंके अधिकार सुनिश्चित करना सम्मिलित है । मोदी शासनने अपनी इस योजनाके अन्तर्गत गत तीन वर्षोमें नक्सल क्षेत्रोंमें ३०७ थाने खोले हैं । इस शासनने सबसे विकट क्षेत्रोंमें भी १३९१ किलोमीटर सडकका निर्माण कराया है । ९ नक्सल प्रभावित क्षेत्रोंमें कुल ५४१२ अतिरिक्त सडक निर्माणको स्वीकृति दी गई है, जिसपर ११७२५ कोटि रुपएकी लागत आएगी ।
कई विकास योजनाओंके विस्तारके लिए अतिरिक्त कोषके लिए गृह मन्त्रालय पहले ही वित्त मन्त्रालयसे सम्पर्क कर चुका है, जिन्हें नक्सल प्रभावित राज्योंमें आरम्भ किया गया था ।
स्रोत : इण्डिया स्पीकस डेली
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