सन्तोंका अहं नष्ट हो चुका होता है; इसीलिए उनके देहमें रहते हुए भी हम उनके छायाचित्रपर माला चढाकर उन्हें पूजते हैं; अतः साधको, अपने दोष एवं अहंको नष्ट करने हेतु संकल्पबद्ध होकर प्रयास करें ! विश्वास करें, चिरन्तन आनन्दकी अनुभूतिके साथ ही आपका यश शाश्वत हो जाएगा एवं आप सम्पूर्ण जगतमें पूजे जाएंगे !
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