बिहारके धर्मान्ध ‘बौद्ध मिशनरी’से त्रिपुराके १८ आदिवासी बच्चे मिले, उत्पीडनका आरोप !


सितम्बर १५, २०१८

बिहारमें उत्तरी त्रिपुराके पेचर्थल प्रान्तके रहने वाले १८ आदिवासी बच्चोंको ‘बौद्ध मिशनरी’से छुडाया गया, जिन्हें शुक्रवार शामको अगरतला लाया गया । बच्चोंको देखते हुए एक अधिकारीने बताया है कि देखने से ज्ञात हो रहा है कि बच्चोंका उत्पीडन किया गया है । बताया जा रहा है कि बच्चोंमें से अधिकतरको दो वर्ष पूर्व उनके कुटुम्बने बौद्ध धार्मिक संस्थानमें अध्ययनके लिए भेजा था !

बिहार पुलिसके एक अधिकारीने बच्चोंके बारेमें बताया कि त्रिपुराके बच्चोंको बोध गयामें एक बौद्ध धार्मिक संस्थानमें अध्ययनके लिए रखा गया था, जो कि दो माह पूर्व ही बन्द हो गया था । पुलिस अधिकारियोंने बिना किसीका नाम लिए बताया कि आदिवासी बच्चोंको कुछ दिवसके लिए सुरक्षित देखभालके साथ रखा गया, जिसके पश्चात उन्हें उनके कुटुम्बके लोगोंके पास भेज दिया गया था । उन्होंने यह भी बताया कि बिहारके बौद्ध शैक्षिक संस्थानमें असमके करबी एंग्लोंग प्रान्तके अधिक बच्चे थे । उन्हें त्रिपुरा वापस रास्ते पर गुवाहाटी रेलवे स्टेशनपर अधिकारियोंको सौंप दिया गया था ।

त्रिपुराके स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मन्त्री सुदीप रॉय बर्मन शुक्रवार शामको बच्चोंको लेनेके लिए अगरतला रेलवे स्टेशन पहुंचे । उन्होंने कहा कि हमारे बच्चे सुरक्षित वापस त्रिपुरा लौट आए हैं । घटनाकी उचित जांचके लिए जनजातीय कल्याण विभाग बिहारको पत्र लिखा जाएगा । बर्मनने कहा कि हम सभीके लिए यह सचेत होने वाली घटना है ।

त्रिपुरा राज्य बाल कल्याण समितिके अध्यक्ष नीलिमा घोषने कहा कि बच्चोंके तनपर यातनाके संकेत मिले थे ! उन्होंने यह भी कहा कि बिहारमें बौद्ध मिशन संचालित विद्यालयमें परिजनोंको अपने बच्चोंकी शिक्षाके लिए पैसे देना पडता था । उन्होंने कहा कि हमें विवरण मिला है कि बिहारके बौद्ध संचालित विद्यालयमें अध्ययनके लिए कुछ लोगोंने बच्चोंके अभिभावकोंसे पैसा लिया हैं । हमें यह भी बताया गया कि बच्चोंका उत्पीडन किया गया था ।

घोषने कहा मैंने बच्चों से भेंट की है और उन्होंने हुई यातनाओंके बारेमें भी कुछ संकेत दिए हैं । उन्होंने कहा कि वह इस प्रकरणपर स्वास्थ्य मन्त्री से चर्चा करेंगे । उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि बच्चोंके लिए गठित कल्याण समिति शीघ्र ही इस प्रकरणपर वैधानिक कार्यवाही करेगी ।

 

“क्या बुद्धकी शिक्षा यही है ? धर्मान्ध बौद्धोंने भी मिशनरीका निर्माण कर लिया है । ध्यान रहे ! यह तथाकथित पन्थोंके अन्तका संकेत मात्र है ।” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : अमर उजाला



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