सितम्बर १६, २०१८
मुगल वंशके अन्तिम शासक बहादुर शाह जफरके कथित उत्तराधिकारी होनेका दावा, प्रिंस याकुब हबीबउद्दीन तूसी करते रहे हैं । इस बार प्रिंस तूसीने राम मन्दिरपर बडा वक्तव्य दिया है। समाचार विभाग ‘एएनआई’को दिए अपने वक्तव्यमें प्रिंस तूसीने कहा कि यदि अयोध्याकी विवादित भूमिपर मन्दिरका निर्माण करवाया जाता है तो हमें बाबरका वंशज होनेके नाते कोई आपत्ति नहीं है ! इसके अतिरिक्त यदि मन्दिरकी नींव रखी जाएगी तो पहली ईंट रखनेके लिए खुद मैं वहां जाऊंगा !
हैदराबादके रहने वाले प्रिंस याकुब हबीबउद्दीन तूसीने एएनआईसे कहा, “बाबरने मरनेके समय हुमायूंसे अपनी सम्पत्तिके बारेमें कहा था कि मीर बाकीने अयोध्यामें जो कृत्य किया है, उससे पूरे तैमूर वंशपर कलंक लग गया है । दूसरी बात जो उन्होंने कही थी कि यदि हिन्दुस्तानमें तुम्हें शासन करना है तो सन्तों-महंतोंको आदर दो । मन्दिरोंकी रक्षा करो और एक जैसा न्याय करो । मुगलोंने कभी भी भारतकी जनताका मन नहीं दुखाया है । मीर बाकीने किया तो हमने अयोध्यामें जाकर भी कहा है और सारे हिन्दू समाज से भी क्षमा मांगी है । इसके अतिरिक्त जो क्षेत्रीय नेता हैं, जिनका इस प्रकरण से कोई लेना-देना नहीं है । ये पूर्ण रूपसे उत्तराधिकारका प्रकरण है । हमारे पास एक जोकर है हैदराबादमें, ओवैसी । इसके अतिरिक्त एक है, ‘मुस्लिम पसर्नल लॉ’, जिनका इस प्रकरण से कोई लेना-देना नहीं है ।
प्रिंस तूसीने दावा किया कि यह पूर्ण रूपसे उत्तराधिकारका प्रकरण है, मन्दिर-मस्जिदका नहीं है । विवादित भूमिपर न तो मस्जिद बन सकती है और न ही नमाज हो सकती है, इसीलिए न्यायालयसे हमने कहा है कि यदि यह सम्पत्ति बाबरकी निकल रही है तो हमें मन्दिर बनानेकी अनुमति देनेमें कोई आपत्ति नहीं है ।
“प्रत्येक मुसलमानने इस सत्यको स्वीकार करना ही होगा कि यह एक हिन्दू राष्ट्र है और आप यदि इस राष्ट्रमें है तो ईश्वरका धन्यवाद करें ! अतिथिको यहां सर-आंखोंपर बैठाया जाता है, परन्तु यदि अतिथि घरमें घुसकर चिल्लाए तो उसे बाहर फेंकना पडता है, यह ध्यान रखें ! राम मन्दिर हिन्दुओंके लिए सर्वस्व है, मुसलमान इसमें सहयोग कर सकता है, परन्तु अडचन डालनेका न उसका अधिकार है और न दिया जाएगा !” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जनसत्ता
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