आयुर्वेद एक परिपूर्ण शास्त्र कैसे है


आयुर्वेद किसीके पथ्य या जीवन शैली भोजनकी पद्धति या वृत्ति और दैनिक जीवनचर्यापर विशेष महत्त्व देता है । ऋतुमें परिवर्तनके आधारपर जीवनशैलीको कैसे अनुकूल बनाया जाए, इसपर भी आयुर्वेद मार्गदर्शन देता है ।
इसप्रकार आयुर्वेद रोग उत्त्पन्न न हो और व्यक्ति स्वस्थ रहे, इसपर अधिक बल देता है, वस्तुत: आयुर्वेदमें रोग निवारणको २० % और स्वस्थ रहनेको ८० % महत्त्व दिया गया है । एलोपैथीमें मात्र रोगी और रोगको ही महत्त्व है ! इसलिए आयुर्वेद एक परिपूर्ण शास्त्र है, किन्तु दुःख तब होता है, जब आज अनेक आयुर्वेदिक वैद्य रोगियोंको आयुर्वेदिक औषधिके स्थानपर अंग्रेजी औषधियां देते हैं । परिपूर्ण शास्त्रकी स्नातककी पढाई कर अपूर्ण शास्त्रका अभ्यास करना, इससे बडा दुर्भाग्य इस देशका और क्या हो सकता है ?



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