सितम्बर १७, २०१८
उच्चतम न्यायालयने सोमवारको (१७ सितम्बर, २०१८) महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए पुनः वेदना निवारक ‘सेरिडॉन’ विपणिमें विक्रय करनेकी अनुमति दे दी है । एक सप्ताह पूर्व शासनने मानव प्रयोगके लिए ३२८ ‘फिक्स डोज कॉम्बिनेशन’ औषधियोंके वितरण और इसके बनानेपर तुरन्त प्रभावसे प्रतिबन्ध लगा दिया था । शासनके इस निर्णयके पश्चात औषधि बनाने वाले उद्योग न्यायालयमें पहुंच गए और शासनके निर्णयको चुनौती दी । न्यायालयके निर्णयमें अन्य दो औषधियोंको भी प्रतिबन्ध हटाया गया है । भारत और विश्वके कई देशोंके चिकित्सक और विशेषज्ञ इन औषधियोंके निरन्तर बढते प्रयोगपर चेतावनी देते रहे हैं । इनके विक्रयपर भारतमें विशेष चिन्ताका कारण है, क्योंकि एकल औषधियोंके विपरीत भारतीय बाजारमें इसका भाग विश्वमें सबसे अधिक है ।
केन्द्रने गत दिवस ऐसी ३२८ एफडीसी औषधियोंपर प्रतिबन्ध लगाया था, जिसमें मेल सही नहीं पाया गया था । इसे रोगियोंके लिए काफी हानिकारक बताया गया था । जिनपर प्रतिबन्ध लगाया उसमें सिरमें वेदना, खांसी, अतिसार और उदरकी समस्यासे सम्बन्धित औषधियां सम्मिलित हैं । इसमें अधिकतर ऐसी हैं, जिन्हें लोग छोटी से भी समस्या होनेपर बिना परामर्शके खा लेते हैं ।
‘एफडीसी’ वह औषधियां होती हैं, जिन्हें दो या इससे अधिकके मेलसे बनाया जाता है । मार्च २०१६ में ३४४ औषधियां प्रतिबन्ध करनेके पश्चात शासनकी दृष्टिमें और १००० औषधियां थीं, जिन्हें प्रतिबन्ध किया जाना था । परन्तु न्यायालयके इस निर्णयके पश्चात सरकारको निराशा हाथ लगी है ।
“महर्षि पाणिनी, चरक, च्यवन जैसे महर्षियोंका आयुर्वेद रूपी महाज्ञान हमारे कोषमें होते हुए भी हम हिन्दू कितने निर्धन हो चूके है ! सहस्त्रों वर्षोकी धर्मविहीनता हमें आज उस स्थितिमें ले आई है, जहां हमें इस कुछ वर्ष प्राचीन तथाकथित विज्ञान ‘ऐलोपैथिक’पर आश्रित होकर विषकारी औषधियोंका सेवन करना पड रहा है ।” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जनसत्ता
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