सितम्बर १७, २०१८
केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मन्त्री रामदास अठावलेने कहा कि अयोध्यामें न तो राम मन्दिर था और न हीं मस्जिद, वहां बौद्ध मन्दिर था ! यदि उस स्थानकी खुदाई की जाए तो बौद्ध मन्दिरके अवशेष मिल जाएंगे ! इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ‘एससी-एसटी एक्ट’को लेकर सवर्णोंको गलतफहमी हुई है । आज भी वही है, जो पहले से लागू था । समाचार माध्यमके अनुसार, राजस्थानके जयपुरमें शनिवारको (१५ सितम्बर) एक कार्यक्रममें उन्होंने कहा कि, “हिन्दुओंने बुद्ध मन्दिरको तोड दिया और राम मन्दिर बनाया । मुसलमानोंने राम मन्दिर तोड दिया और वहां मस्जिद बना दी । अब मस्जिदको तोड दिया गया है । मेरा सुझाव है कि वहांकी ६६ एकड भूमिको हिन्दुओं और मुसलमानोंके मध्य विभाजित दिया जाए ! ४० से ४५ एकड हिन्दुओंको मन्दिर निर्माणके लिए और २० एकड मुसलमानोंको मस्जिद निर्माणके लिए दे दिया जाए ! हिन्दू अपना मन्दिर बनाएं और मुसलमान अपनी मस्जिद बनाएं !”
उन्होंने आगे कहा कि, “इलाहाबाद उच्च न्यायालयका निर्णय ऐसा है कि वहांकी भूमिको कई पक्षोंको विभाजित करनेके लिए कहा गया है । प्रकरण अभी उच्चतम न्यायालयमें है । अभी इसपर किसी प्रकारका निर्ण नहीं आया है; लेकिन मुझे लगता है कि जो कुछ भी हो, वह आम सहमति से हो । देखा जाए तो वह स्थान बौद्ध मन्दिरका है ।”
बीजेपी सांसद निशिकान्त दुबे रविवारको कनभारा पुलके शिलान्यास समारोहमें पहुंचे थे । इस मध्य भाजपा कार्यकर्ता पंकज शाहने कहा कि सांसदने पुलका उपहार देकर जनतापर बहुत उपकार किया है । इस कारण वचनके अनुसार उनके चरण धोकर पीनेका मन कर रहा है ।
“शासनकर्ताओंमें कुछ गुण आवश्यक है, जिसमें सबसे महत्वपूर्ण ‘बुद्धि’ है, अन्यथा उसका परिणाम सबको भोगना पडता है” – सम्पादक, वैदि उपासना पीठ
स्रोत : जनसत्ता
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