सितम्बर १९, २०१८
केन्द्रीय मन्त्रिमण्डलने एक बारमें ‘तीन तलाक’को दण्डनीय अपराध बनाने सम्बन्धी अध्यादेशको स्वीकृति दे दी है । केन्द्रीय मन्त्री रविशंकर प्रसादने बुधवारको यह जानकारी दी । ‘मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक’को लोकसभाकी स्वीकृति मिल चुकी है; लेकिन यह राज्यसभामें लम्बित है । वहां पर शासनके पास पर्याप्त संख्या बल नहीं है ।
उच्चतम न्यायालयने गत वर्ष इस प्रथापर रोक लगा दी थी । यह प्रथा अब भी जारी है; इसलिए इसे दण्डनीय अपराध बनाने हेतु विधेयक लाया गया ।
कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवालाने कहा कि मोदी सरकार मुस्लिम महिलाओंके लिए ‘तीन तलाक’को न्यायका मुद्दा नहीं बना रही है, बल्कि इसे राजनीतिक मुद्दा बनानेके प्रयासमें लगी हुई है ।
वहीं रविशंकर प्रसादने इसपर कांग्रेसको आडे हाथों लिया है । उन्होंने कहा कि सरकारने तीन तलाक विधेयकको पारित करवानेका बार-बार प्रयास किया, लेकिन कांग्रेसने वोटबैंक के लिए इसे पारित नहीं होने दिया । उन्होंने कहा कि कांग्रेसने इस मुद्देपर वोटबैंककी राजनीति कर रही है ।
उन्होंने सोनिया गांधी, पश्चिम बंगालकी मुख्यमन्त्री ममता बनर्जी और बसपा सुप्रीमो मायावतीसे विनती की कि उन्हें इसपर सरकारका साथ देना चाहिए ।
बता दें कि संशोधित विधेयकमें ‘तीन तलाक’को गैर जमानती अपराध माना गया है । संशोधनके अनुसार, अब आरोपीको जमानत देनेका अधिकार न्यायाधीशके पास होगा । अभियोग चलानेसे पूर्व न्यायाधीश पीडिताका पक्ष सुनकर आरोपीको जमानत दे सकता है ।
साथ ही न्यायाधीशके पास ये भी अधिकार होगा कि वो पति-पत्नीके मध्य सन्धि कराकर, विवाहको बनाए रख सके । इसके अतिरिक्त, पीडिता और उसके परिजन ‘एफआईआर’ प्रविष्ट करा सकते हैं ।
“शासनके इस निर्णयका हम स्वागत करते हैं । अब क्या भाजपा हिन्दू हितोंके प्रकरणपर भी अध्यादेश लाएगी ?”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : अमर उजाला
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