सितम्बर २०, २०१८
उत्तर प्रदेशके आतंकवाद रोधी दलने (एटीएस) गत दिवसोंमें हिजबुल मुजाहिदीनके सन्दिग्ध आतंकी कमर-उज-जमांको पकडा था । वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एटीएस) जोगेन्द्र कुमारने बताया कि असम निवासी कमर-उज-जमां राष्ट्रीयको पकडनेमें जांच विभाग ‘एनआईए’का भी सहयोग मिला । उन्होंने बताया कि आरम्भिक पूछताछमें असमके जमुनामुख निवासी जमांने स्वीकार किया कि वह हिज्बुलका सक्रिय सदस्य है । यह भी ज्ञात हुआ कि वह गणेश चतुर्थीके अवसरपर कानपुरमें किसी दुर्घटना करनेकी प्रतिक्षामें था । उसने कानपुरमें एक मन्दिरकी रेकी भी की थी ।
यद्यपि कमरके बारे में जो जानकारियां सामने आईं हैं वह काफी अचम्भित करने वाली हैं । समाचारके अनुसार कमर वहाबी विचारधारासे जुडनेसे पूर्व उदारवादी था । वह नवरात्रका त्योहार मनाता था ! इसके अतिरिक्त वह व्रत भी रखता था ! परन्तु कमर कट्टरपन्थी विचारधाराकी ओर उस समय आकर्षित हुआ, जब वो वर्ष २००८ में ‘रिपब्लिक ऑफ पलाऊ’ पहुंचा । वहां से आनेके पश्चात उसमें काफी परिवर्तन आया और कश्मीर चला गया । आईजी एटीएसने बताया कि कमर-उज-जमां चार वर्ष तक ‘रिपब्लिक ऑफ पलाऊ’में रहा । इस मध्य वहां होने वाली जमातोंमें सम्मिलित होता, इससे वहाबी विचारधाराकी ओर वह आकर्षित हुआ ।
वर्ष २०१२ में भारत लौटा और २०१३ में कश्मीर पहुंच गया । कमर अप्रैल २०१७ में ओसामा नामक व्यक्तिके साथ जम्मू-कश्मीरके किश्तवाडके एक पहाडके जंगलोंमें आतंकवादका प्रशिक्षण लेने गया था । २०१३ से २०१७ के मध्य वह कानपुर आता-जाता रहा । यहां बता दें कि कमरको बन्दी बनानेके पश्चात उससे पूछताछ की जा रही है और इसमें अन्य सुरक्षा विभागोंकी सहायता भी ली जा रही है ।
“स्पष्ट है कि किसी विशेष धर्मान्ध समुदायसे जुडनेके पश्चात उसके मनमें अन्योंके लिए विष घोला गया ! उसे ‘तथाकथित धर्म’की घुट्टी पिलाई गई, जिससे उसने उसने नरसंहारकी ओर अपना मुख किया, तब कैसे कहा जा सकता है कि सभी धर्म एकसमान है ! वस्तुतः सनातन धर्म ही ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’की शिक्षा देता है” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जनसत्ता
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