सितम्बर २१, २०१८
बॉम्बे उच्चन्यायालयने गणपति विसर्जन और आगामी नवरात्रि उत्सवके समय डीजे और डॉल्बी साउण्ड सदृश उच्च ध्वनिविस्तारकोंके प्रयोगपर महाराष्ट्र शासनद्वारा लगाए गए प्रतिबन्धको हटाने से मना कर दिया । गणेश उत्सव रविवारको राज्यभरमें विसर्जन जुलूसके साथ समाप्त होगा ।
न्यायाधीश शान्तनु केमकर और सारंग कोटवालकी खण्डपीठने ‘प्रोफेशनल ऑडियो एण्ड लाइटिंग एसोसिएशन (पीएएलए)’की अन्तरिम राहत वाली याचिकाको नकार दिया । ‘पीएएलए’ने ध्वनिविस्तारकोंके प्रतिबन्धको चुनौती दी है ।
उच्च न्यायालयने कहा कि संगठन यह सिद्ध करने में असफल रहा कि ऐसे ध्वनिविस्तारकोंका प्रयोग निर्धारित ध्वनि सीमाका उल्लंघन किए बिना किया जा सकता है । पीठने पिछली सुनवाईमें राज्य शासनद्वारा प्रस्तुत दलीलोंपर विचार किया, जिसमें महाधिवक्ता आशुतोष कुम्भकणीने कहा था कि डीजे और डॉल्बी ऑडियो सिस्टम्स ध्वनि प्रदूषणके मुख्य स्रोत हैं ।
कुम्भकणीने कहा कि जब डीजे या डॉल्बी सिस्टम बजना आरम्भ होता है तो ध्वनिका स्तर १०० डेसीबलके पार चला जाता है, जो कि ध्वनि प्रदूषण नियम, २००० के अन्तर्गत स्वीकृति सीमा से कहीं अधिक है !
न्यायालयने कहा, ”हम याचिकाकर्ताकी इस याचिकाको स्वीकार नहीं कर सकते कि नगरमें ध्वनिका स्तर पहले ही स्वीकृत स्तर से अधिक है और ‘डीजे’से थोडा ही शोर बढेगा; इसलिए इसे अनुमति दी जानी चाहिए ।”
“वस्तुत: पवित्र गणेशोत्सव सात्विकताका प्रतीक है, परन्तु धर्मका उचित ज्ञान न होनेके कारण आज हिन्दू इनका प्रयोग करता है । हिन्दुओं ! ढोल, नगाडे,करताल, मंजिरा, भजन आदि सात्विक साधनोंका ही प्रयोग करें ! और न्यायालयसे यहीं आशा है कि जिसप्रकार हिन्दू त्यौहारोंके समय इसपर प्रतिबन्ध लगाया है, अन्य पन्थोंके तथाकथित त्यौहारोंपर भी इसे प्रतिबन्धित किया जाए !” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : एबीपी न्यूज
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