जातिगत द्रोहमें विद्यालय भी सम्मिलित, जाति संज्ञान हेतु बच्चोंने पहने रंग बिरंगे कटिबन्ध और ‘टैटू’ !


सितम्बर २४, २०१८

तमिलनाडुके कुड्डालूरमें कई विद्यालयोंमें कटिबन्ध (बैंड) और ‘टैटू’ बच्चोंकी जातिके संज्ञानके लगाए गए हैं !कुड्डालूरमें सर्वाधिक पिछडा वर्ग ‘वानियार्स’की बहुलता है, वहीं अनुसूचित जाति दूसरे स्थानपर हैं, जो कि कुल जनसंख्याका ‘कम से कम’ ३० प्रतिशत है । दोनोंके मध्य पुराना झगडा है । दोनोंके मध्य यह लडाई विद्यालयतक पहुंच गई है ! लाल और नीला कटिबन्ध (रिस्ट बैंड) निचले वर्गको दर्शाता है और वहीं पीला और हरा रंग ‘वानियारों’को अथवा ऐसे राजनीतिक दलका समर्थन दर्शाता है, जो समुदायका समर्थन करती है।

छात्र, आम अथवा एक स्टार वाले ‘टैटू’का प्रयोग कर अपनी जाति, किसी जाति विशेषके प्रति अपने समर्थनको दर्शाते हैं । जिलेमें काम करने वाले अधिकारीने ‘पीटीआई भाषा’को बताया कि यहां छात्रोंके मध्य छोटी-छोटी सी बातोंपर झगडा होता है, जैसे लडकोंके लडकियोंसे बात करनेपर, प्रेस किए हुए कपडे पहनने आदि पर ।

उन्होंने बताया कि विद्यालयमें जाति आधारित झगडे साधारण बात हैं । यहां तक कि शिक्षक भी पिछडी जातियोंके बच्चोंके प्रति पक्षपात पूर्ण रवैया रखते हैं ! छात्रोंके मध्य जाति आधारित झगडोंको देखते हुए जिला प्रशासनने १७ प्वाइंटों वाली आचार संहिता जारी की है, जिनमें अन्य वस्तुओंके अतिरिक्त इस प्रकारके रंगबिरंगे कटिबन्धपर प्रतिबन्ध लगाया गया है ।

 


“क्या यहीं शिक्षा हम अपने भविष्यकर्ताओंको दे रहे हैं ! जिसबप्रकार वृक्षकी जड दुर्बल होती है, वह वृक्ष भी गिर जाता है, उसीप्रकार दूषित संस्कारों व शिक्षासे सींचा बालक कभी राष्ट्रनिर्माता नहीं बन सकता ! हिन्दू राष्ट्रमें ऐसा दुष्कृत्य नहीं होगा और बालकोंका सर्वांगीण विकास किया जाएगा ।” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : अमर उजाला



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