सितम्बर २६, २०१८
उत्तराखण्ड उच्च न्यायालयने कहा है कि गंगा और यमुनाकी स्वच्छताको लेकर बैठक व समारोह करने से कुछ नहीं होगा, इसके लिए ठोस पग उठाए जाने अनिवार्य है । उच्च न्यायालयने कडी चेतावनी देते हुए कहा कि जो परिस्थितियां आज हैं, उन्हें नहीं सुधारा गया तो सरस्वतीकी भांति गंगा और यमुनाका अस्तित्व भी समाप्त हो जाएगा !
उच्च न्यायालय दिल्लीके एक कार्यकर्ताके पत्रको संज्ञानमें लेते हुए प्रकरणकी सुनवाई कर रहा था । न्यायालयने कहा कि सरस्वती नदी पहले से ही समाप्त हो चुकी है । अब यदि प्रयास नहीं किए गए तो भविष्यमें हमारी आने वाली हमारी पीढी केवल चलचित्रों और लिखित-पत्रोंमें ही नदियां देख सकेगी !
न्यायाधीश वीके बिष्ट और लोक पाल सिंहने राज्य सरकार और केन्द्र सरकारको निर्देश दिए कि दोनों नदियोंकी धर्मनिष्ठाको बनाए रखते हुए स्वच्छता करवाएं ! न्यायालयने कहा कि सरकारको गंगा और यमुनामें फेंके जा रहे कूडे, बहाए जा रहे गंदे पानी और नदियोंमें जा रहे औद्योगिक कचरेको तत्काल प्रतिबन्धित करना चाहिए ! पीठने यह भी कहा कि शासन न्यायालयको भी सुझाव दे कि दोनों नदियोंकी स्वच्छताको लेकर क्या पग उठाए जाने चाहिए । न्यायालयने कहा कि दोनों नदियां न केवल हमें पीनेके लिए जल देती हैं, बल्कि देशकी कृषि क्रान्तिमें भी इनका बहुत बडा योगदान है ।
“यद्यपि विश्वके समूचे विकसित राष्ट्र अपनी नदियोंको माता नहीं मानते है, तथापि उन्होंने केवल नदियां मानकर ही उन्हें कितने अच्छेसे स्वच्छ रखा है, परन्तु अपने लालच और भौतिकतावादकी अन्धी दौडमें, माता पुकारी जाने वाली देवनदियोंको गन्दा करने वाले व शासनपर बल देकर कार्य न करवाने वाले धर्माभिमान खो चूके, हिन्दुओंसे बडा धर्मविहीन इस समूचे जगतमें होगा क्या !! हिन्दुओं ! देवनदियोंके अनादरके कोपका भाजन बनना पडेगा । स्मरण रहें ! ‘धर्मो रक्षति रक्षितः’।।” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : नभाटा
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