सितम्बर २६, २०१८
‘गणपति बप्पा मोरया’का उद्घोष करनेके पश्चात ‘एआईएमआईएम’के विधायक वारिस पठानकी मौलवियोंने आलोचना की है, जिसके पश्चात पठानने मंगलवारको क्षमा प्रार्थना की है ! उसमें वह कह रहे हैं कि कुछ दिवस पूर्व उनसे कुछ ऐसे शब्द निकल गए थे, जो ठीक नहीं थे । उन्होंने कहा कि उनसे चूक हुई है और पुनः ऐसा नहीं करेंगे । मानव हूं, चूक होती है, अल्लाह क्षमा करने वाला है ।
पठान मुम्बईके गणेशोत्सवके समय एक कार्यक्रममें सम्मिलित हुए थे । उन्होंने पूजा की और ‘गणपति बप्पा मोरया’का उद्घोष किया । वहीं शिवसेनाने भी वारिस पठानका समर्थन करते हुए कहा है कि उन्हें क्षमा मांगनेकी आवश्यकता नहीं है । शिवसेनाके अरविन्द सावन्तका कहना है कि क्या हिन्दू अजमेर शरीफकी दरगाह नहीं जाते ? तो एक मुसलमानके गणपति पण्डालमें जानेमें क्या बुराई है ? क्या गणपति बप्पा मोरया कहना अपराध है ? क्या इससे उनका धर्म परिवर्तन हो जाता है ?
“धर्मान्धताकी सीमा है कि कैसे एक व्यक्तिपर दबाव बनाकर क्षमा मंगवाई जाती है, क्योंकि उसने एक हिन्दू देवताका जयघोष किया ! और हिन्दू नेता तथाकथित धर्मनिरपेक्षताके पुरोधर बनते हैं, वहां माथा टेकते हैं और चादरें चढाते हैं, पर मात्र एक जयघोषसे इस्लाम संकटमें आ गया ! इससे सपष्ट है कि धर्मान्ध इस देशमें रहने योग्य भी नहीं है, क्योंकि यदि केवल जयघोष ही नहीं सहन कर सकते तो लोगोंको कैसे सहन करेंगें और इससे ही धर्मान्धोंके मस्तिष्कमें भरे विषका बोध होता है”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : अमर उजाला
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