सितम्बर २८, २०१८
झारखण्डके रांचीके प्रसिद्ध पहाडी मन्दिरमें श्रद्धालुओंद्वारा दान किए गए पैसे गल गए ! तीन माह पूर्व एसडीओने सभी दान पत्रको बन्द करवा दिया था ! जिससे न केवल वहांके पुजारीका वेतन रुका हुआ है बल्कि रुपए भी गल गए ! प्रश्न यह भी उठता है कि रुपयोंके सगने और गलनेका दोषी कौन होगा ?
विगत कई माहसे पुजारी और वहांके कर्मचारियोंके वेतनका भुगतान नहीं हुआ और ३ माहसे सभी दान पात्रको बन्द करके रखा गया था ! यह सब एसडीओके आदेशपर किया गया था । तीन माह पश्चात जब २५ न्यायाधीशोंकी देखरखमें दान पत्रको खोला गया तो देखा गया आधेसे अधिक रुपए सड चुके हैं ! पहाडी मन्दिर विकास समितिके अध्यक्ष डीसी और उसके पश्चात एसडीओ होते हैं । एसडीओने जब पहाडी मन्दिर विकास समितिसे व्ययका ब्यौरा मांगा था तो कोषाध्यक्षने त्यागपत्र दे दिया था, उसीके पश्चात दान पात्र बन्द कर दिए गए थे; लेकिन साथ ही दानपात्र खोलनेमें देरी कर दी गई ।
“यह है मन्दिरोंके सरकारी नियन्त्रणका दुष्परिणाम ! केवल देवालयोंकी सम्पत्तिपर ही सरकारोंकी कुदृष्टि क्यों है ?, यह अवश्य विचारणीय है ! देवालयों और देवोंकी अवमानना जितनी इस निधर्मी लोकतन्त्रमें हुई है, उतनी कभी नहीं हुई !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जी न्यूज
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