सात्त्विक रहनेसे हमारा शरीर स्वस्थ रहता है एवं चित्त शान्त एवं बुद्धि विवेकमें परिवर्तित होती है । इससे अध्यात्ममें आगे जानेमें सहायता मिलती है; किन्तु कुछ अज्ञानी इस तथ्यको स्वीकार्य नहीं करते हैं एवं अपने तमोगुणी आचरणका अपने विवेकहीन बुद्धिसे समर्थन करते हैं; फलस्वरूप वे अध्यात्ममें प्रगति नहीं कर पाते हैं । शीघ्र आध्यात्मिक प्रगति हेतु मन, वचन एवं कर्म तीनोंपर नियन्त्रण अति आवश्यक होता है एवं सात्विक आचरण, इन तीनोंपर नियन्त्रण करनेमें सहायक होता है ।
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