बांग्लादेशके प्रथम हिन्दू मुख्यन्यायाधीशका ‘देश निकाला और भयादोहन (ब्लैकमेल) !’


सितम्बर २१, २०१८

‘बीबीसी हिन्दी’से विशेष वार्तामें बांग्लादेशके प्रथम हिन्दू मुख्य न्यायाधीश एसके सिन्हाने वर्ष २०१७ में देश छोडनेका कारण ‘परिवारपर प्राणघातक संकट’ बताया ! बांग्लादेशमें पिछले दोनों मतदानोंके पश्चात प्रधानमन्त्री शेख हसीनाके नेतृत्व वाली आवामी लीगकी सरकार बनी और एसके सिन्हा इसी मध्य देशके मुख्य न्यायाधीश बने थे ।

वर्ष २०१७ में देशसे एकाएक ऑस्ट्रेलिया निकल गए ! उनकी प्रकाशित एक पुस्तक ‘ए ब्रोकन ड्रीम: रूल ऑफ लॉ, ह्यूमन राइट्स एण्ड डेमोक्रैसी’में भी इस बातका दावा किया है ।

एसके सिन्हा इस समय किसी अज्ञात देशमें रह रहे हैं । वहीं से उन्होंने ‘बीबीसी हिन्दी’से विस्तारसे बात की और कहा कि उपयुक्त समयपर भारत आकर सारी सच्चाई उजागर करेंगे !

उन्होंने कहा, “मैं बांग्लादेशमें न्यायपालिकाकी पारदर्शिता और लोकतान्त्रिक प्रक्रियाके हितमें बात कर रहा था; लेकिन शासन और सुरक्षा विभाग मेरे पीछे पड गए ! मुझे अपने घरमें अनौपचारिक रूपसे ओझलसा कर दिया गया ! मुझपर देश छोडनेका दबाव बनाया गया और अन्ततः देश से निकाल भी दिया गया !”

भारतसे सटे सिलहट प्रान्तके रहने वाले पूर्व न्यायाधीशका दावा है कि उनके पूर्वजोंके घरमें जासूसी करने वाले संयन्त्र बिछाए गए थे और क्योंकि वे ‘बांग्लादेश वॉर ट्राइब्यूनल’के प्रकरणकी सुनवाई कर रहे थे, तो चरमपन्थियोंने उनके घरको बम से उडानेकी योजना बना ली थी !
जस्टिस सिन्हाके दावों और आरोपोंके मध्य बांग्लादेशकी आवामी लीग सरकारने उनकी सभी बातोंको ‘निराधार’ बताया है ।

शेख हसीना शासनके मन्त्रिमण्डल सदस्य ओबैदुल कादिरने कहा, ” सिन्हाने देशके बाहर बैठकर एक मनगढन्त कहानी लिखी है । शक्ति जानेकी घृणाके चलते वे ऐसा कह रहे हैं और उन्होंने ये सभी आरोप तब क्यों नहीं लगाए, जब वे स्वयं बांग्लादेशके मुख्य न्यायाधीश थे ।”

मैंने सहस्त्रों मील दूर बैठे जस्टिस सिन्हासे यही प्रश्न पूछा तो उन्होंने कहा, “मेरा जिस प्रकारसे भयादोहन (ब्लैकमेल) किया गया, ये कहानी किसी को ज्ञात नहीं ! सरकारको जब लगने लगा कि मैं उनके सत्तामें बने रहने वाले कार्योंके विरुद्घ हूं और चाहता हूं कि देशमें निष्पक्षता हो, तभी से मैं उन्हें खटकने लगा । मेरे कुछ मित्रों और परिजनोंको दृष्टिओझल (नजरबन्द) कर लिया गया और मुझपर सुरक्षा विभागने तुरन्त देश छोडनेका दबाव बनाया ! मेरी पत्नीको भी धमकाया गया !” उन्होंने आरोप लगाया है कि, देशकी प्रधानमन्त्री और उनके मन्त्रियोंको यह बुरा लगा कि मैं देशके विधानमें (कानूनमें) १६वें संशोधनके चलते मतदान प्रणालीमें पारदर्शिता लाना चाहता था । साथ ही देशकी निचली स्तरकी न्यायिक प्रणालीमें भ्रष्टाचार समाप्त करने और उत्तरदायित्व निर्धारित करनेके मेरे पगका जमकर विरोध हुआ !”

‘बीबीसी बांग्ला सेवा’के शुभज्योति घोषके अनुसार, “सिन्हा, बांग्लादेशी प्रधानमन्त्री शेख हसीनाकी धर्म-निरपेक्ष नीतियोंके पात्र रहे हैं ! देशके अल्पसंख्यक हिन्दू समुदायसे सम्बन्ध रखनेके अतिरिक्त उनका सम्बन्ध भारतके मणिपुर राज्य से भी है ।”

 

“क्या यही है, बांग्लादेशकी तथाकथित धर्मनिरपेक्षता ! बांग्लादेशकी लोप होती हिन्दू जनसंख्या व हिन्दुओंके प्रति हो रहे अत्याचार स्वतः ही कहानी प्रकट करते हैं ।” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : बीबीसी



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