सात्त्विक रहनेसे हमारा सूक्ष्म वलय (प्रभामण्डल) सकारात्मक रहता है, इससे हमारे जीवनमें सुख-समृद्धि स्वतः ही आकृष्ट होती है । मैंने पाया है कि जो सात्त्विक नहीं रहते हैं; चाहे वे कितना भी बहुत स्वच्छ, आधुनिक और बाह्य रूपसे आजकी भाषामें सभ्य (स्मार्ट) दिखे, वे यदि मूलत: सात्त्विक नहीं होते हैं तो उनका वलय नकारात्मक होता है । हमारे ‘आध्यात्मिक उपाय केन्द्र’में आर्थिक कष्टकी समस्या लेकर आए सभी पुरुषोंका वलय नकारात्मक था और इसे हमने उन्हें ‘यूटीएस’ नामक वलय जांचनेवाले आधुनिक वैज्ञनिक उपकरणसे प्रमाणित कर भी दिखाया है और जब वे सात्त्विक रहने लगें और साधना करने लगें तो उनका वाले सकारात्मक हो गया और कष्ट भी स्वतः ही न्यून हो गए; अतः अपने कष्टोंके समाधान हेतु भी सात्त्विक रहें ।
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