अक्तूबर २,२०१८
केरलके पथानमथिट्टामें स्थित सबरीमाला देवालयमें प्रत्येक आयुकी महिलाओंको प्रवेशकी अनुमति देने वाले न्यायालयके निर्णयके विरोधमें राज्यमें सहस्त्रों महिलाएं विरोध प्रदर्शन कर रही हैं । विवरणके अनुसार, मंगलावारको ४००० से अधिक महिलाओंको विरोधके समय बन्दी बनाया गया है । बता दें कि यह महिलाएं मांग कर रही हैं कि केरल शासन सर्वोच्च न्यायालयके सबरीमाला देवालयमें महिलाओंके प्रवेशकी अनुमति देनेके निर्णयके विरुद्ध पुनर्विचार याचिका दायर करे !
इस विरोध प्रदर्शनके समय महिलाओंने नारे लगाते हुए राज्य और केन्द्र शासनसे मांग की कि न्यायालयके निर्णयकी समीक्षा करनी चाहिए । महिलाओंका कहना है कि यह निर्णय ८०० वर्ष प्राचीन परम्परापर विश्वास रखने वालोंके विरुद्ध था; इसलिए इस बातको ध्यानमें रखते हुए पुनर्विचार याचिका प्रविष्ट करनी चाहिए । हम लोकतान्त्रिक व्यवस्थासे हमारी बात सुननेके लिए कह रहे हैं । वहीं इस मध्य, केरलके मुख्यमन्त्री पिनाराय विजयनने सोमवारको एक बैठक आयोजित की थी जिसमें देवालयकी ओर जाने वाले मार्गके साथ सुविधाओंको बढानेके लिए आवश्यकतापर चर्चा की गई ।
इस बीच, सीपीआई-एम, भाजपा राज्य इकाईके साथ-साथ पाण्डलम रॉयल फैमिली सहित कई राजनीतिक दलोंने न्यायालयके निर्णयके विरुद्घ निराशा व्यक्त की है ।
“कहां ब्रह्माण्डके गूढ रहस्योंको संजोए, सूक्ष्म अभिव्यक्तिपर आधारित सनातन धर्म और कहां इन तथाकथित महिला क्रान्तिकारी व नियम बनाने वालोंका लिंग आधारित व धर्मविहीन बुद्धि, प्रेमविहीन हृदयपर आधारित अल्पज्ञान !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : अमर उजाला
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