वर्तमान कालमें व्यभिचारी, बलात्कारी, भ्रष्ट, धूर्त, देशद्रोही एवं धर्मद्रोही लोगोंकी संख्यामें बहुत अधिक वृद्धि हुई है; क्योंकि माता-पिता ठीकसे साधना नहीं करते हैं या करते ही नहीं है । मात्र सात्त्विक माता-पितासे ही सात्त्विक सन्तानोत्पत्ति हो सकती है । पूर्व कालमें हिन्दू सात्त्विक होते थे और उनकी अगली पीढी तेजस्वी और सुसंस्कारी हो इस हेतु वे विशेष रूपसे सतर्क रहते थे एवं गर्भकालसे ही गर्भस्थ शिशुपर सात्त्विक संस्कार अंकित करनेका प्रयास करते थे । सात्त्विक सन्तानकी उत्पत्ति हेतु वे सगोत्र विवाह टालते थे; विवाह शुभ मुहूर्तमें करते थे और विवाहके संस्कारको भावपूर्वक विधि-विधानपूर्वक करते थे । इतना ही जीवपर सात्त्विक संस्कार अंकित हो, इसलिए हिन्दू धर्ममें सोलह संस्कारमें विधान बताए गए हैं; कालान्तरमें धर्मशिक्षणके अभावमें ये सभी संस्कार लुप्त प्राय या विकृत हो गए; इसलिए हिन्दुओंमें भी तमोगुणी जीव जन्म लेने लगे, जिनकी वृत्ति आसुरी होती है और वे राष्ट्र और समाजके लिए ही नहीं अपने कुटुम्बके लिए भी कंटक होते है; अतः यदि आपको सात्त्विक सन्तान चाहिए तो सात्त्विक रहें !
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