पूर्वके कालमें ‘बुद्धिको समझ आता है, वही सत्य है’ इस वृत्तिके समाज तथा न्यायाधीश इत्यादि न होनेके कारण ‘हनुमानजी एक उडानमें श्रीलंका पहुंच गए,’ इसके अनुसार रामायण, साथ ही महाभारत तथा विविध पुराणोंकी ऐतिहासिक कथा, उसकेही अनुसार ‘ज्ञानेश्वर महाराजने भैंसेके मुखसे वेद बुलवाया’ इत्यादि इतिहास बतानेवालोंको दण्ड नहीं दिया गया । अब’ बुद्धिके परे कुछ अनुभव हुआ, तो वह न छापें, ऐसा सुझाव अधिवक्ता देते हैं । उस कारण मनुष्यको अनेक बडी घटनाओं और उसके पीछेके शास्त्रसे वंचित रहना पडता है । हिन्दू राष्ट्रमें बुद्धिके परेका बतानेवालोंका गौरवगान किया जाएगा ।
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