अक्तूबर १०, २०१८
भारतीय गुप्तचर विभाग ‘आईबी’द्वारा गृह मन्त्रालयको एक ब्यौरा भेजा गया है, इसमें रोहिंग्या शरणार्थियोंके भारतके उत्तरपूर्वी राज्योंसे दक्षिणी राज्योंकी ओर पलायन करनेकी सूचना दी गई है । विवरणके अनुसार, दक्षिणमें जिन स्थानोंपर रोहिंग्या शरणार्थियोंका पलायन हुआ है, उनमें केरल और हैदराबाद प्रमुख हैं । गुप्तचर विभागका कहना है कि यह असमके गुवाहटीसे पालघाटकी ओर गुवाहटी-त्रिवेन्द्रम सेंट्रल एक्सप्रेस, दिल्लीसे चलने वाली नॉर्थ ईस्ट एक्सप्रेस और डिब्रूगढसे कन्याकुमारी तक जानेवाली विवेक एक्सप्रेसद्वारा हुआ है । साथ ही पलायन करने वाले रोहिंग्या शरणार्थियोंके साथ आतंकी संगठनके लोग भी देखे गए हैं ! गुप्तचर विभागने इसे देशकी सुरक्षाके लिए गम्भीर संकट माना है ।
‘द प्रिंट’के एक विवरणके अनुसार, गत २६ सितम्बरको रेलवे सुरक्षा बलने भी गृह मन्त्रालयको रोहिंग्या शरणार्थियोंके पलायनको लेकर सूचित किया था, जिसके पश्चात गृहमन्त्री राजनाथ सिंहने गृह सचिवको कहकर केरल शासनको चौकन्ना करनेका निर्देश दिया था । ‘आरपीएफ’द्वारा दी गई सूचनाके अनुसार, रोहिंग्या शरणार्थी केरल और तमिलनाडु जाने वाली १४ विभिन्न रेलयानोंमें सवार हुए हैं । सरकारने आरपीएफको भी इस प्रकरणमें कडी निगरानी करनेका आदेश दिया है । गुप्तचर विभागके विवरणमें जो सबसे चिन्ताजनक बात है वो यह कि आतंकी संगठन ‘हरकत उल जिहाद अल इस्लामी’के कुछ आतंकी इन रोहिंग्या शरणार्थियोंके साथ देखे गए हैं ! बता दें कि ‘हरकत उल जिहाद अल इस्लामी’ बांग्लादेश और पाकिस्तानमें सक्रिय आतंकी संगठन है ।
सूत्रोंके अनुसार, ‘हरकत उल जिहाद अल इस्लामी’के सदस्योंके अतिरिक्त रोहिंग्या शरणार्थियोंके साथ कुछ कट्टरपन्थी लोग भी थे, जो कि शरणार्थियोंको गुमराह कर अपने साथ जोड सकते हैं । इसे देशकी सुरक्षाके लिए बडा संकट माना जा रहा है । सूत्रोंके अनुसार, रोहिंग्या शरणार्थी आतंकियोंके लिए सरल लक्ष्य हैं, वो इन्हें सरलतासे भ्रमित कर सकते हैं । ऐसे समाचार भी मिले हैं कि कुछ लोग आतंकी संगठनोंमें सम्मिलित भी हो गए हैं और उन्हें नेपालके रास्ते प्रशिक्षणके लिए भेजा जा चुका है । वहीं इसे रोकनेके लिए सरकार भी पग उठा रही है । सूत्रोंके अनुसार, रोहिंग्या शरणार्थियोंको बांग्लादेशमें ही रोककर रखनेका प्रयास किया जा रहा है ।
“इतनी विकट व दुःखद परिस्थितिको देखकर लगता नहीं कि हम एक सुरक्षित देशमें हैं ! जहां आतंकी खुलेमें घूमें, घुसपैठियें इधर-उधर शासनकी नाकके नीचेसे जाए, वहां क्या सुरक्षा होगी, स्वयं सोचे !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जनसत्ता
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