अक्तूबर १२, २०१८
मध्यप्रदेशमें शिवराज शासनपर सन्तोंने धर्मको लेकर कार्य नहीं करने आरोप लगाया और साथ ही सन्तोंके साथ भेदभावका आरोप लगाया । उनके अनुसार सरकारको धर्मकी रक्षा करनी चाहिए, केवल उसे भुनाना ही नहीं चाहिए ।
गोमातापर विवाद : सन्तोंने शिवराज सरकारपर गायोंकी देखभाल नहीं करनेका आरोप लगाया । उनके अनुसार उन्होंने सरकारसे मांग रखी थी कि गोमाताकी सेवाके लिए कार्य हो और उनकी दुर्दशा दूर हो; लेकिन उनकी ओरसे कोई कार्य नहीं किया गया !
सन्तोंकी समाधि हटा दी – कार्यक्रममें एक सन्तने आरोप लगाया कि ढिंढोरीमें सन्तोंकी समाधि और उनका निवास स्थान होता था; लेकिन शिवराजके नेताओंने वहां से समाधि तुडवा दी और सन्तोंको उनके स्थानसे भगा दिया ।
भूमि नहीं देनेका आरोप – सन्तोंने आरोप लगाया कि आजतक सरकारने किसी देवालयको भूमि नहीं दी । इससे कई देवालय जर्जर हो चुके हैं ।
देवालय संस्थान (ट्रस्ट) बना दिए जाते हैं – सन्तोंने कहा कि सरकार स्वयंको धार्मिक सरकार बताती है । सन्तोंके अनुसार जो देवालय अच्छा कार्य करता है, उसे सरकार संस्था बना लेती है; लेकिन ऐसा मस्जिद और गुरुद्वारेके साथ नहीं होता !
इसके अतिरिक्त सन्तोंने कहा कि चित्रकूटमें कम-से-कम १०० झुग्गी तोड दी हैं । बाबरके समयमें सन्त इतना परेशान नहीं हुए, हम कांग्रेसके समयमें भी परेशान नहीं हुए; लेकिन बीजेपीके समयमें परेशान हो गए । हमको रोना आता है कि ये हमारे नामसे सरकार बनाते हैं, ये हमारे नामसे तो खाते हैं; लेकिन हमें बाहर भगाते हैं !
कार्यक्रममें स्वामी नवीनानन्द सरस्वती ने कहा, “मैं आपको एक प्रमाणके साथ बताता हूं । पूरे देवालयमें जितने देवालय सडक किनारे आते थे, उनको तोडकर फेंक दिया दिया जाता है; लेकिन भोपालमें कमला पार्कमें एक मस्जिदकी सीमा सडकपर आ रही थी, उसे १० फीट भी नहीं हटाया ! कोटि रुपयोंका पुल बना दिया गया, परन्तु हाथतक नहीं लगाया तो फिर हिन्दुओंके साथ भेदभाव क्यों किया जाता है ?”
“यह है देवालयोंकी स्थिति और विवेकहीन हिन्दू राजनेताओंमें अपना तारनहार ढूंढते हैं, इससे अधिक हास्यास्पद क्या होगा ?”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : आजतक
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