वैज्ञानिक अनेक वर्ष शोध करके कोई संशोधन करते हैं । कुछ वर्ष उपरान्त उस सन्दर्भमें नवीन संशोधन होता है तथा पूर्वके संशोधनको दुर्लक्ष्य किया जाता है । इसके विपरीत अध्यात्ममें संशोधन नहीं करना पडता । ईश्वरसे योग्य ज्ञान अपने आप प्राप्त होता है तथा वह चिरन्तन सत्य होनेसे उसमें कोई परिवर्तन नहीं होता । इससे ज्ञात होता है कि अध्यात्मकी तुलनामें विज्ञान कैसे बालवाडी जैसा है – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक सनातन संस्था
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