अक्तूबर १४, २०१८
केरलके प्रसिद्ध सबरीमाला मन्दिरमें महिलाओंके प्रवेशसे पूर्व न्यायालयके आदेशका विरोध भी तेज हो गया है । बुधवारसे न्यायालयके आदेशके अनुसार देवालयमें प्रत्येक आयुकी महिलाओंका प्रवेश आरम्भ हो जाएगा । इस मध्य राजधानी तिरुअनंतपुरममें निर्णयके विरुद्घ जारी प्रदर्शनमें एक महिलाने स्वयंको पेडसे लटकाकर आत्महत्याका प्रयास भी किया, यद्यपि वहां उपस्थित लोगोंने पुलिसकी सहायतासे महिलाको सुरक्षित बचा लिया है ।
न्यायालयके आदेशका पालन करानेके लिए केरल सरकारने कमर कस ली है और सुरक्षाकी कडी व्यवस्था की गई हैं । इस मध्य महिलाओंके प्रवेशसे पूर्व इसके विरोधको लेकर सियासत आरम्भ हो गई है । बीजेपी सहित कई राजनीतिक दल और धार्मिक संगठनोंने केरल शासनके विरुद्घ मोर्चा खोल दिया है । सबरीमाला मन्दिरका द्वार बुधवारको ५ दिवसकी मासिक पूजाके लिए खुलने वाले हैं । इस अवसरपर महिला संगठनोंने देवालयमें प्रवेशकी योजना बनाई है ।
केरलके मुख्यमन्त्री पिनारई विजयनने मंगलवारको स्पष्ट कर दिया कि सबरीमाला देवालय प्रकरणपर किसीको कानून अपने हाथमें लेनेकी आज्ञा नहीं दी जाएगी ! सरकार श्रद्धालुओंको देवालयमें प्रवेश करनेके लिए सभी आवश्यक व्यवस्था करेगी । सबरीमाला मंदिरमें महिलाओंके प्रवेशको चुनौती देनेके लिए शासन न्यायालयमें कोई समीक्षा याचिका नहीं प्रविष्ट करेगी । विजयनने कहा कि उनका शासन न्यायालयको बता चुकी है कि उसके आदेशका प्रत्येक परिस्थितिमें पालन किया जाएगा ।
त्राणवकोर देवसोम मण्डलने तांत्री (प्रमुख पुरोहित) परिवार, पंडलाम राजपरिवार और अयप्पा सेवा संघम सहित भिन्न-भिन्न संगठनोंकी मंगलवारको बैठक की । १७ नवम्बरसे आरम्भ हो रही विशेष पूजाकी तैयारीके लिए बुलाई गई इस बैठकमें उच्चतम न्यायालयके निर्णयपर भी चर्चा होनेका भी अनुमान है । गत सोमवारको मुख्यमंत्री पिनारई विजयनने देवालयके पुजारी परिवारको (पण्डालम) बैठकके लिए बुलाया था ताकि मध्यका कोई मार्ग निकल सके; लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका है । सबरीमाला मन्दिरकी लडाई महिला अधिकार कार्यकर्ता तृप्ति देसाईने लडी है । न्यायालयके निर्णयके पश्चात उन्होंने घोषणा की है कि वे शीघ्र देवालयमें प्रवेश करेंगी ।
“सहस्त्रों वर्षोंकी मानसिक दासता, अर्मण्यताने हिन्दुओंकी यह स्थिति कर दी है कि उन्हें देवालयों तकके लिए लडना पड रहा है और नारियोंके लिए लडने वाली तथाकथित समाजसेवी महिलाएं स्मरण रखें कि वे ईश्वरके नियमोंसे छेडछाड कर वे केवल पापकर्म ही अर्जित कर रही हैं !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : आजतक
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