श्रीगुरु उवाच


जिन्हें गुरुमन्त्र मिला हो, वे ध्यान दें !   
‘गुरुमन्त्र मिल गया है; अतः प्रगति हो गई’, ऐसा अनेक व्यक्ति सोचते हैं । उनके ध्यानमें यह नहीं आता कि गुरुमन्त्रके साथ गुरुने तन-मन-धन, इनका त्याग करनेके लिए कहा होता है । वह न करते हुए केवल गुरुमन्त्र, वह भी भावपूर्ण, एकाग्रतासे घण्टों न कर, थोडा बहुत किया तो कभी प्रगति होगी क्या ?



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