अक्तूबर १८, २०१८
झारखण्डके पाकुड जनपदमें एक अव्यस्क (नाबालिग) लडकीको धर्मान्तरणके लिए विवश करनेके आरोपमें एक वरिष्ठ पशु-चिकित्सकको बन्दी बना लिया गया है । एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारीने यह जानकारी दी । पुलिस अधीक्षक शैलेन्द्र प्रसाद बर्नवालने बुधवार, १७ अक्तूबरको कहा कि लडकीके पिताके वक्तव्यके आधारपर पशु-चिकित्सकके विरुद्घ आईपीसी और ‘झारखण्ड धर्मान्तरण निरोधक कानून-२०१७’की धाराओंके अन्तर्गत प्रकरण प्रविष्ट (दर्ज) किया गया ।
इसका संज्ञान लेते हुए पुलिसने मंगलवार, १६ अक्तूबरको सांवलापुर गांवमें छापेमारी की, पशु-चिकित्सकको बन्दी बनाया और गांवमें चल रही एक धार्मिक सभाके स्थानसे १३ वर्षकी लडकीको छुडाया । लिट्टीपारा पुलिस थानेमें प्रविष्ट कराई गई प्राथमिकीमें रोडेगो गांवकी निवासी लडकीके पिताने कहा कि दालू सोरेन नामके पशु-चिकित्सकने उनकी पुत्रीको प्रलोभन दिया और ५०० रुपएकी प्रस्तुति (पेशकश) करके अपने वाहनमें उसे साथ ले गया !
पुलिसके अनुसार, आरोपीने लडकीको बताया था कि धार्मिक सभामें उसका धर्मान्तरण किया जाएगा । उसे विश्वास दिलाया गया था कि मिशनरी अधिकारी उसकी शिक्षा एवं अन्य आवश्यकताओंका ध्यान रखेंगे ।
बर्नवालने बताया कि पुलिस इस आरोपकी भी जांच कर रही है कि सोरेन पहले भी ग्रामीणोंका धर्मान्तरण करा चुका है । लडकीको परामर्शके लिए बाल कल्याण केन्द्र भेज दिया गया है । पाकुडके एक न्यायालयने मंगलवारको सोरेनको १४ दिवसकी न्यायिक हिरासतमें भेज दिया ।
“ईसाई मिशनरियां निर्धनोंको ही लक्ष्य बनाकर, धनका लोभ देकर, सुरसा समान फैलनेका प्रयास कर रही हैं ! हिन्दुओं ! इनका उद्देश्य केवल धर्मान्तरण व अराजकता फैलाना है; अतः अब मुखर होकर इनके विरुद्घ बोलनेका समय है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : लाइव हिन्दुस्तान
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