हिन्दू धर्ममें चार वर्ण हैं । उसपर आलोचना करनेवाले बुद्धिप्रमाण्यवादियोंको तथा अन्य धर्मियोंको यह ज्ञात नहीं होता है कि सर्व क्षेत्रोंमें ऐसा ही है, उदा. आधुनिक चिकित्सकोंमें बालरोग विशेषज्ञ, स्त्रीरोग विशेषज्ञ, नेत्रचिकित्सक, हृदयरोग विशेषज्ञ, मनोरोग विशेषज्ञ, जैसे अनेक प्रकार हैं, उसीप्रकार साधनामें आयु, स्त्री-पुरुष, वर्ण इत्यादिनुसार भेद हैं । साधनाके सन्दर्भमें इतने भेद होना हिन्दू धर्मकी अद्वितीयता दर्शाता है । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक सनातन संस्था
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