कलियुगमें भक्तियोग अनुसार साधना करना अधिक सरल है; क्योंकि आजके कालके लिए यह सर्वथा उपयुक्त साधना पद्धति है ! अन्य योगमार्गोंकी तुलनामें इस योगमार्गके गुरु अधिक सुलभतासे प्राप्त होते हैं और भक्तिमार्ग तमोगुणी जीव भी सहजतासे कर सकता है और यही भक्ति उसकी सात्त्विकताको बढाती है जो अंतत: उसे त्रिगुणातीत बनाती है ।
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