कुछ दिवस पूर्व इन्दौरके एक सामाजिक कार्यक्रममें गई थी । मंचपर दीप प्रज्ज्वलन हेतु २५ लोग थे ! वैसे ही मंचपर माला पहनने और पहनाते हुए छायाचित्र खिंचवाने हेतु भी होड लगी हुई थी ! मंचपर इतनी कुर्सियां थीं कि मंचकी शोभा ही समाप्त हो गई थी ! आजके सामजिक कार्यक्रमोंमें भी लोग मात्र अपने अहंकी पुष्टि हेतु जाते हैं ! – तनुजा ठाकुर
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