अक्तूबर २५, २०१८
साइबर ठगी और आतंकी गतिविधियोंकी सूचनापर आतंकवाद निरोध दस्ता (एटीएस), रांची पुलिस और साइबर सेलने रांचीके कांटाटोली क्षेत्रमें छापेमारी की । कांटाटोलीके हासिब इंक्लेवके एक सदनिकामें (फ्लैटमें) और कांकेके भीठा स्थित एक घरका अन्वेषण किया गया । इस मध्य दोनों स्थानोंसे सात सहस्त्रसे अधिक सिमकार्ड पाए गए हैं ! साथ सिम बॉक्स और मॉनिटर भी प्राप्त हुए !
पुलिसने दोनों स्थानोंसे एक-एक युवकको बन्दी बनाया है; लेकिन जावेद नहीं मिला, जिसकी पुलिसको खोज थी । बन्दी युवक जावेदका परिचित है । इस प्रकरणमें सदनिकाके स्वामीसे भी पुलिसने पूछताछ की है । जानकारीके अनुसार मालिकने पुलिसको बताया कि वह इस सदनिकाको अशरफ नामक व्यक्तिको किराए पर दे रखा था ।
छापेमारीका नेतृत्व सिटी एसपी अमन कुमार और एटीएस एसपी पी मुरूगन कर रहे थे । पुलिस इस प्रकरणमें भी जांच कर रही है कि कहीं ये प्रकरण आतंकी गतिविधियोंसे जुडा तो नहीं है । छापेमारीमें ३५० चलभाष क्रमांककी सूची मिली है । पुलिसको सूचना मिली थी कि हसिबा इंक्लेवके एक सदनिकामें जावेद अहमद नामक व्यक्तिके द्वारा सात सहस्त्र सिमकार्डके साथ ‘सिमबॉक्स’का संचालन किया जा रहा है !
जानकारीके अनुसार कंपनीके पूर्व कर्मी अब्दुल जमीदके सहयोगसे जावेदको सिमकार्ड मिला था । इसके स्थानपर जावेदने अब्दुलको सात लाख रुपये दिए थे । चलभाष क्रमांक को पटनासे एक्टिवेट किया गया था । इस प्रकरणमें कंपनीके वरिष्ठ संचालक पुरुषोत्तमका भी नाम सामने आ रहा है । पुलिसके अनुसार जावेद अभी दुबईमें है । पुलिसको शंका है कि इन सिमकार्ड्सका प्रयोग साइबर क्राइम, धार्मिक उन्माद और आतंकी गतिविधियोंके संचालनमें हो सकता है ।
“हमारे नेता एक वर्गके लिए कहते हैं कि एक हाथमें संगणक हो, परन्तु यदि बुद्धिमें बाल्यकालसे ही धर्मान्धताका विष बोया गया हो तो क्या उसे तकनीकी कौशल्य देनेसे और अधिक कुशल आतंकी नहीं निकलेगा ? और उच्च शिक्षितोंका आतंकियोंके साथ सम्मिलित होना, विस्फोटक व सिमकार्ड मिलना क्या यह उसीका प्रमाण नहीं है ?”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : न्यूज १८
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