केरलके डीजीपीका हिन्दू विरोधी वक्तव्य, २००० बन्दी बनाए हैं, आवश्यकता पडी तो और करेंगे !!


अक्तूबर २६, २०१८

सबरीमालामें सभी आयुकी महिलाओंके प्रवेशको लेकर उच्चतम न्यायालयके आदेश और उसपर जारी विवाद और हिंसासे सम्बन्धित ४५० अभियोगमें अब तक २००० लोगोंको बन्दी बनाया जा चुका है । केरल पुलिसके डीजीपी लोकनाथ बेहराके अनुसार अशांति फैला रहे कई और लोगोंका संज्ञान कियख जा चुका है और विधान बनाए रखनेके लिए यदि और लोगोंको बन्दी बनाना पडा तो बनाएंगे !

बता दें कि न्यायालयके आदेशके पश्चात् श्रद्धालु महिलाओंको देवालयमें प्रवेश करने नहीं दे रहे हैं । लोकनाथके अनुसार पुलिस समितिसे इस बारमें परामर्श मांगा गया है कि कैसे महिलाओंका देवालयमें सुरक्षित प्रवेश सुनिश्चित कराया जा सके ? अभी हम इसका कोई हल निकालनेका प्रयास कर रहे हैं और शीघ्र ही परिणाम सामने होंगें ।


सबरीमाला देवालयमें महिलाओंके प्रवेशको लेकर उच्चतम न्यायालयका निर्णय आनेके पश्चात् भी विवाद नहीं रुक पा रहा है । मासिक पूजाके पश्चात् सोमवार, २२ अक्तूबरको देवालयके पट बंद हो गए, लेकिन न्यायालयके आदेशके पश्चात् अभी तक १० से ५० वर्षकी किसी भी महिलाको देवालयमें दर्शन नहीं मिल पाए हैं और अब देवालयपर स्वामित्वको लेकर भी प्रश्न उठने लगे हैं !

ऐतिहासिक तथ्योंके अनुसार, सबरीमालापर पहले पंडालम राजाका एकाधिकार था । इसके पश्चात् १८१२ में त्रावणकोर शासनने ३४७ दूसरे देवालयोंके साथ इस तीर्थस्थानका भी अधिकार ले लिया था । ‘त्रावणकोर ट्राइब्स ऐंड कास्ट’के अनुसार, जिसे मानविकीविद् दीवान बहादुर एल ए कृष्णा अय्यरने लिखा था, “पंडालम राजा, कक्कात्तू पोत्ती, पेरिनाड फोक और कोचुवेलनका सबरीमालापर सामूहिक रूपसे अधिकार था ।”

“केरलकी साम्यवादी सरकारका हिन्दुओंसे अंग्रेज वायसरॉयकी भांति व्यवहार कष्टप्रद है ! लाखों श्रद्धालुओंके विरोधके पश्चात् जब एक भी महिलाको चोटतक नहीं आई तो यह हिंसा कैसे हुई ? अब हिन्दू राष्ट्रकी स्थापनापर ही देवालयोंका रक्षण किया जा सकता है ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : न्यूज १८



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