अक्तूबर २३, २०१८
एक प्रसार वाहिनीपर इलाहाबादका नाम प्रयागराज रखनेको लेकर वार्ताके समय इस प्रकरणपर बहस चल रही थी कि क्या मोदी शासन भारतको मुगल मुक्त बनाना चाहती है ? इस मध्य एक मौलाना इतना भडक गए कि उन्होंने कहा कि वह डंकेकी चोटपर कहते हैं कि वह औरंगजेबके अनुयायी हैं !
सम्वाददाताने जब भाजपा प्रवक्तासे यह प्रश्न किया कि क्या वह भारतको मुगल मुक्त बनाना चाहते हैं ? इसपर सम्बित पात्राने कहा कि मुगल मुक्त भारत तो कई सौ वर्षों पूर्व हो चुका है । मुगलोंके पश्चात् अंग्रेज आए और भारत अब अंग्रेज मुक्त भी हो चुका है, परन्तु जो मानसिक रुपसे और वोटबैंककी राजनीतिके लिए कुछ नेता मुगल सल्तनत चलने देना चाहते हैं, वो हम चलने नहीं देना चाहते ! पात्राने कहा कि आज जब उनका शासन मुगल सल्तनतके नाम बदल रही है तो कुछ लोगोंको इसपर आपत्ति क्यों हो रही है ? देशका एक वर्ग आज भी इस निर्णयके विरोधमें क्यों खडा है ? इसके पश्चात् सम्वाददाताने इसमें ‘गरीब नवाज फाउंडेशन’के अध्यक्ष अंसार रजासे इसपर प्रश्न किया तो उन्होंने कहा कि भाजपाकी स्थिति यहां खिसयानी बिल्ली खंभा नोंचे वाली हो गई है । जनताने भाजपाका शासन इसलिए चुना थी कि वह कुछ विकास करेंगें और भारतको विकासकी राहपर आगे ले जाऐंगें; लेकिन ये साढे चार वर्षमें कुछ कर नहीं पाए और अब हिन्दू मुसलमानोंको लडाना चाहते हैं ! इसपर संबितने कहा कि इन्हें नाम परिवर्तनसे आपत्ति नहीं है, लेकिन क्या ये कोई आपत्ति न होने वाले लक्षण हैं ? पात्राने कहा कि अब मुगलिया शासन गया और अब नहीं आने वाला ! यदि कोई ये सोचता है कि मुगलिया शासन पुनः वापस आ जाएगा, तो उसे हम वापस आने नहीं देंगे ! इस पर अंसार रजाने संबित पात्रासे प्रश्न पूछते हुए कहा कि आप ये कहते हैं कि हम नाम बदलेंगे ! बिल्कुल बदलिए, लेकिन इस बातका भी उत्तर दे दीजिए कि केवल नाम बदलेंगे या मुगलोंकी बनाए भवनोंपर बुल्डोजर भी चलाएंगे ? इसपर सम्वाददाताने अंसार रजासे पूछा कि क्या आप औरंगजेबको लुटेरा नहीं मानते हैं या मोहम्मद बिन कासिमको लुटेरा नहीं मानते हैं तो अंसार रजाने लगभग चीखते हुए कहा कि मैं औरंगजेबको लुटेरा नहीं मानता हूं और डंकेकी चोटपर कहता हूं कि मैं औरंगजेबका अनुगामी हूं !
“औरंगजेब निकृष्टतम व क्रूरतम मुगल अत्याचारी था, इसको उनके वंशज तक मान कर क्षमा प्रार्थना करते हैं !, परन्तु मौलाना स्वयंको उनका अनुगामी बताकर, क्या घोर हिन्दू विरोधी होने व धर्मान्धताका परिचय नहीं दे रहे है ? क्या ऐसा व्यक्ति राष्ट्रमें रहने योग्य है ? स्वयं विचार करें !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जनसत्ता
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