श्रीगुरु उवाच


‘भारतकी स्वतन्त्रता हेतु लडनेवाले युवा क्रान्तिकारियोंको सम्मोहितकर उन्हें कृति करने हेतु विवश किया गया’, ऐसा बुद्धिप्रामाण्यवादियोंने कल कहा तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए !



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