अक्तूबर २९, २०१८
अयोध्यामें राम जन्मभूमि- बाबरी मस्जिदकी भूमिको लेकर न्यायालयमें सुनवाई होनी है । शिया वक्फ बोर्डके अध्यक्ष वसीम रिजवीने कहा है कि कट्टरपंथी मौलानाओं और कांग्रेसके कारण प्रकरण न्यायालयमें फंसा है ।
वसीम रिजवीने कहा, “जो ईश्वर मानवके भाग्यका निर्णय करता है, वह अपने घरके निर्णयके लिए मानवीय न्यायालयके निर्णयकी प्रतीक्षा कर रहा है । यह मानवके लिए लज्जाजनक है ।”
उधर ‘आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’के सदस्य खालिद रशीद फरंगी महलीने कहा कि प्रत्येक हिन्दुस्तानी चाहता है कि यह प्रकरण न्यायालयकेद्वारा हल हो जाए । अब आवश्यकता देशके इस बडे प्रकरणके समाधान होनेकी है । न्यायालयका जो भी निर्णय आएगा, उसे सभी देशवासी स्वीकार करेंगे । उन्होंने कहा कि कुछ लोग न्यायालयके निर्णयकी बात न मानने की बात कह रहे हैं । वे लोग न्यायालयके महत्वको कम कर रहे हैं ।
प्रकरणमें मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारीने कहा कि जो भी निर्णय होना हो वह शीघ्रातिशीघ्र हो । ७० वर्षोंसे विवाद हो रहा है । समूचे प्रकरणमें नेता अपनी राजनीतिक रोटी सेंक रहे हैं ।
“न्यायालयके पास व्याभिचार फैलाने वाले निर्णयके लिए समय है, समलैंगिकता जैसे दुर्गुणको वैध बतानेके लिए समय है, सबरीमालापर हिन्दुओंके अस्थास्थानको चोट पहुंचानेके लिए समय है, बस राम मन्दिरके लिए ही नहीं है ! इसीसे न्यायपालिकाका हिन्दू द्रोह उजागर होता है”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : न्यूज १८
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