इस संसारमें चार प्रकारके लोगोंको ईश्वर चाहिए होता है, एक वह है जो बहुत दुःखी होता है और उसके पास अपने दुःखोंको दूर करनेका एक मात्र साधन ईश्वर होते हैं, ऐसे लोग मायासे दुत्कारे जानेपर ईश्वरकी शरणमें आते हैं । दूसरी श्रेणीमें और अधिक सुख, ऐश्वर्य, धन-सम्पत्तिके इच्छुक भोगी लोग होते हैं, उन्हें ज्ञात होता है कि ईश्वरसे मांगनेसे उन्हें इच्छित फलकी प्राप्ति होगी; अतः वे ईश्वरके शरणागत होते हैं । तीसरी श्रेणीमें वे लोग होते हैं जिन्हें धर्म, अध्यात्म, ईश्वर और स्वयंके विषयमें जिज्ञासा होती है और चौथी श्रेणीमें ज्ञानी और मुमुक्षु आते हैं, वे मात्र ईश्वरको पाने हेतु या आत्मसाक्षात्कार हेतु ईश्वरसे प्रेम करते हुए, इस मार्गपर चलते हैं ।
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