नवम्बर ४, २०१८
जम्मू-कश्मीरके पूर्व मुख्यमन्त्री उमर अब्दुल्लाने कहा कि राज्यका भविष्य भारतके साथ है । यदि घाटीके लोग भारतसे अलग होकर स्वतन्त्रता चाहते हैं तो शीघ्र वे अपना अस्तित्व खो बैठेंगे । जम्मू-कश्मीर कभी अपने बलपर नहीं रह पाएगा !
उमर अब्दुल्लाने शुक्रवार, २ नवम्बर रात्रि राधा कुमारकी पुस्तक ‘पैराडाइज एट वार, पॉलिटिकल हिस्ट्री ऑफ कश्मीर’के विमोचनके अवसरपर कहा कि मेरा मानना है कि ऐसे वातावरणमें जब एक ओर पाकिस्तान और एक ओर चीन बैठा है, जम्मू-कश्मीरकी स्वतन्त्रता बनी नहीं रह पाएगी । यह मेरी व्यावहारिक सोच है और यह विश्लेषण जम्मू-कश्मीरकी वास्तविकतापर आधारित है ।
उन्होंने आगे कहा कि राज्यके लोगोंकी स्वतन्त्रताकी मांग उनकी भावनाओंपर आधारित है और वह उसपर कोई तर्क-वितर्क नहीं करना चाहते हैं । इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वर्तमान समयमें घाटीमें जो स्थिति हैं, उससे लोग मुख्यधारामें सम्मिलित दलोंमें विश्वास खो रहे हैं । उमरने कहा कि कश्मीरमें मुख्य दलोंकी राजनीतिक धरातल सिकुड रहा है, लेकिन यह स्थिर नहीं है । मुख्यधाराके राजनीतिक दलों और अलगाववादियोंके मध्य यह उतार-चढाव लगा रहता है । उन्होंने कहा कि गत वर्ष लोगोंको एक आशाकी एक किरण दिखाई दी थी, जब स्वतन्त्रता दिव पर प्रधानमन्त्रीने गोली और दुर्व्यवहारके स्थानपर कश्मीरके लोगोंको गले लगानेकी बात कही थी । एक वर्ष बीत जानेके पश्चात् भी कुछ नहीं परिवर्तित हुआ है ।
“उमर अब्दुल्लाके वक्तव्यका समर्थन करते हैं, क्योंकि वह वास्तविकता है, परन्तु क्या कश्मीरकी स्वतन्त्रताका विचार आतंकी सोच और आतंकियोंद्वारा पिलाई घुट्टीका परिणाम नहीं है ?, अन्यथा वहांके मूल निवासी तो कश्मीरी पण्डित हैं, जो बसे हैं वे तो बाहरी हैं तो स्वतन्त्रताकी भावनाका तो प्रश्न ही कहा है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : अमर उजाला
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