नवम्बर ४, २०१८
राम मंदिरपर हो रही उठा पटकको लेकर समाजवादी पार्टीके नेता आजम खानने बडा वक्तव्य दिया है । उन्होंने कहा कि यह महाभारतकी तैयारी है; लेकिन इनमेंसे मुसलमानोंको हटा ही दिया जाए, उसके पश्चात् निर्धारण कर लिया जाए कि कौन पांडव हैं और कौन कौरव हैं ? उन्होंने कहा कि पांडव और कौरवको लेकर निर्णय बहुसंख्यकोंको करना है ।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि कौरव और पांडव कौन-कौन होंगे ?, यह निर्णय मुसलमानको नहीं करना है, बल्कि आरएसएसको करना है । राम मन्दिरकी इच्छा रखने वालोंको निर्धारित करना है कि अन्ततः इस मार्गकी बाधा कौन है ? यदि, कोई संग्राम होना है तो उसमेंसे मुसलमानका नाम हटा दिया जाए ।
आजम खानने यह भी विनती की कि उत्तर प्रदेशके बाहरके मुस्लिम और नेता इस प्रकरणमें अधिक परामर्श न दें, क्योंकि इस स्थितिको उत्तर प्रदेशके लोगोंको ही सहना पडता है । उत्तर प्रदेशमें अयोध्या है, राम जन्मभूमि है और कृष्ण नगरी मथुरा है । इनके साथ-साथ इससे जुडे तीन महत्त्वपूर्ण प्रश्न भी हैं ।
राम मंदिरको लेकर मुख्यमन्त्री योगीके वक्तव्यपर आजम खानने कहा कि किसी निर्दोषकी लाश और रक्त बहाकर इसका आरम्भ न हो । वैसे भी किसीने राम मंदिरके निर्माण कार्यको नहीं रोका है । अभी, प्रकरण न्यायालयमें है, इसलिए उसकी प्रतिक्षा करनी चाहिए । यद्यपि, उन्होंने यह बात भी कही कि ६ दिसम्बर १९९२ को भी जो कुछ हुआ था, वह न्यायालयके निर्णयके विरुद्ध था । न्यायालयके निर्णयका कब सम्मान किया गया ?
“आजम खानजीको बताना चाहेंगे कि महाभारत तब हुआ था जब दुर्योधनने सुईकी नोक बराबर भूमि देनेसे मना किया था, यहां तो हिन्दू मुगल लुटेरोंद्वारा लूटी अपनी ही देवभूमि (अयोध्या, मथुरा, काशी) मांग रहे हैं ! आप सभीको एकमतसे भूमि रिक्त करनेको कहे, हिन्दूका तो जन्म ही मोक्ष हेतु होता है तो युद्ध कौन चाहेगा ?”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जी न्यूज
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