नवम्बर ९, २०१८
लोकसभा मतदान और प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदीकी अन्तर्राष्ट्रीय छविको देखते हुए केंद्र शासन ‘नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स’से (एनआरसी) बाहर हुए बंग्लादेशियों/लोगाेंको बडी राहत देनेकी रणनीति बना रही है । रजिस्टरसे बाहर हुए जो लोग नागरिकता सिद्ध नहीं कर पाएंगे, सरकार उन्हें वर्क परमिट जारी कर देश निकालासे बचनेकी राह निकालेगी ! सूचिमें मुस्लिमोंके साथ १३ लाख हिन्दू भी हैं, जिनका क्रोध लोकसभा मतदानमें पार्टीको हानि पहुंचा सकता है ।
शीर्ष स्तरपर मंथन जारी है कि एनआरसीमें नहीं आने वाले लोगोंको एक झटकेमें अधिकार छीनकर वापस भेज दिया गया तो मोदीकी अन्तर्राष्ट्रीय स्तरपर बनी छवि क्षीण होगी, क्योंकि उन्हें गत दिवसोंमें ‘सिओल पीस’ पुरस्कार मिला है । बांग्लादेशसे सीमा सन्धिकेद्वारा (बॉर्डर एग्रीमेंट) अच्छे सम्बन्ध बनानेका प्रयास भी हुआ है । आतंकवादके विरुद्घ विश्वमें उन्होंने आवाज सशक्त की है । ऐसेमें कई दशकसे भारतको अपना घर बना चुके लोगोंपर कार्यवाही होती है तो संदेश जाएगा कि भाजपाकी वैचारिक कट्टरताके कारण मोदी सरकारने इतना कडा पग उठाया है ।
सूत्रोंके अनुसार ‘एनआरसी’में बाहर छूटे ४० लाख लोगोंमें से २७ लाख मुस्लिम और १३ लाख हिन्दू हैं, लेकिन अन्तिम सूचीमें ‘एनआरसी’में १० लाखकी संख्या और जुड सकती है । यदि शेष ३० लाख लोग विदेशी घोषित होते हैं तो भी उनके पास विदेशी ट्रिब्यूनलमें जानेका अधिकार होगा । अभी यह प्रकरण विकट है, क्योंकि दशकोंसे रह रहे लोगोंके पास भूमि, घर, राशन कार्ड, आधार कार्ड जैसी सुविधाएं हैं !
यही कारण है कि मतदाता सूचिसे घुसपैठियोंके नाम तत्काल नहीं कट पाएंगे, लेकिन प्रकरणपर हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण अवश्य होगा, लेकिन हिन्दू मतदाताके प्रभावित होनेसे असमके पडोसी राज्य प. बंगालमें भाजपाकी सीटें बढानेकी इच्छापर पानी फिर सकता है । एनआरसी तैयार करनेमें परोक्ष रूपसे जुडे भाजपाके एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि चूंकि सूचिमें मुस्लिम-हिंदू दोनों हैं और सबको वापस भेजना पडा तो असमकी तीन लोकसभा सीटों और लगभग २२ विधानसभा सीटोंपर मुस्लिम प्रभाव पहलेसे भी अधिक हो जाएगा ।
गृह मन्त्रालयके सूत्रोंने पुष्टि की है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारने प्रस्तावको पीएमओसे साझा भी किया है । प्रस्तावके अनुसार ४० लाखसे अधिक लोग, जो रजिस्टरसे बाहर हैं, उनमेंसे अधिकतर अपनी नागरिकताके लिए सम्बन्धित लिखितपत्र जमा कर चुके हैं । इसके पश्चात् अनुमान है कि लगभग ५ से ७ लाख लोग अपनी नागकिरता सिद्ध करनेसे वंचित रह सकते हैं । ‘वर्क परमिट’ व्यक्तिगत रूपसे जारी नहीं कर समूहमें जारी किया जाएगा । समूहमें १० से २० लोगोंको रखनेका प्रस्ताव है । समूहमें ऐसे लोगोंको सम्मिलित किया जाएगा, जो असममें किसी कारणवश एक साथ काम कर रहे हैं ।
कार्य करने वाले श्रमिक भी हो सकते हैं और स्वयंका व्यवसाय करने वाले भी । गृह-मंत्रालयके एक उच्च अधिकारीसे मिली जानकारीके अनुसार संजोय हजारिकाकी सिफारिशके अनुसार बहुतसे घुसपैठिये ऐसे हैं, जो केवल कामकी खोजमें आए हैं । इन्हें ‘वर्क परमिट’ देनेमें परेशानी नहीं है !
“गत दिवसोंमें ऐसे समाचार आ चूके हैं कि रोहिंग्या व बांग्लादेशी धर्मान्ध दुष्कर्म, लव-जिहाद आदिके प्रकरणमें सम्मिलित पाए गए हैं तो क्या ऐसेमें तुष्टिकरणकी राजनीतिके लिए हम इस राष्ट्रको एक भयावह दलदलमें नहीं झोंक रहे हैं ! क्या शान्ति पुरस्कारकी छवि राष्ट्रसे ऊपर हो सकती है ?” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : दैनिक भास्कर
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