नवम्बर १४, २०१८
पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर शाहिद आफरीदी कश्मीरपर दिए गए अपने वक्तव्यसे पलट गए हैं । अब उन्होंने कहा है कि कश्मीरपर दिए गए उनके वक्तव्यको उचित ढंगसे प्रस्तुत नहीं किया गया ।
शाहिद आफरीदीने कश्मीरको लेकर दो ‘ट्वीट’ किए हैं और अपना स्पष्टीकरण दिया है । उन्होंने अपने प्रथम ‘ट्वीट’में कहा है कि उनके वक्तव्यके भागको अधूरा दिखया गया है और दूसरे ट्वीटमें कहा है कि उनके वक्तव्यका अनुचित अर्थ निकाला गया है ।
प्रथम ट्वीटमें उन्होंने लिखा, “मेरी वीडियो अधूरी है और संदर्भसे काटकर प्रस्तुत की गई है । इससे पूर्व मैंने जो कहा वह गायब है । कश्मीर अनसुलझा झगडा है और भारतके क्रूर शासनके अधीन है । इसे संयुक्त राष्ट्रकी सन्धिके अनुसार सुलझाया जाना चाहिए । प्रत्येक पाकिस्तानीके साथ मैं भी कश्मीरके स्वतंत्रता संघर्षका समर्थन करता हूं । कश्मीर पाकिस्तानका भाग है ।”
उन्होंने दूसरे ट्वीटमें लिखा, “मेरी टिप्पणीको भारतीय समाचार माध्यमोंने अनुचित ढंगसे समझा । मैं अपने देशके प्रति प्रेमका भाव रखता हूं और कश्मीरियोंके संघर्षको महत्व देता हूं । वहांपर मानवताका राज होना चाहिए और उन्हें उनके अधिकार मिलने चाहिए ।”
इससे पूर्व इंग्लैंडकी संसद कही जाने वाली ‘हाउस ऑफ कॉमन्स’में आफरीदीने कहा कि पाकिस्तानको कश्मीरकी चिंता नहीं करनी चाहिए ! शाहिद आफरीदीने कहा था कि पाकिस्तानसे अपने ४ प्रान्त तो सम्भलते नहीं हैं, इसलिए पाकिस्तानको कश्मीरकी चिन्ता नहीं करनी चाहिए । उनके इस वक्तव्यका पाकिस्तानमें काफी विरोध हुआ और भारतने खूब उछाला । इसके पश्चात् वे अपने पुराने वक्तव्यसे पीछे हट गए ।
शाहिद आफरीदीने कहा था कि पाकिस्तानसे अपने ४ प्रांत तो संभलते नहीं हैं, इसलिए पाकिस्तानको कश्मीरकी चिंता नहीं करनी चाहिए । शाहिद आफरीदी यहां अपनी संस्था ‘शाहिद आफरीदी फाउडेंशन’से जुडे किसी कार्यक्रममें भाग लेने आए थे ।
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व भी शाहिद अाफरीदी कश्मीरसे जुडे प्रकरणपर कई बार बोल चुके हैं । गत वर्ष भारतमें हुए ‘टी-२०’ विश्वकपके समय एक मैचमें शाहिदने कहा था कि हमें समर्थन करनेके लिए कई लोग कश्मीरसे भी आए थे, मैं उनका धन्यवाद करता हूं । शाहिदके इस वक्तव्यपर भी बवाल मचा था ।
“इसे भय कहते है, जो इस्लाम, पाकिस्तानका मुख्य अंग है । भारतमें आए दिवस बुद्धिवादियों व विधर्मियोंद्वारा राष्ट्र विरोधी, धर्मद्रोही वक्तव्य आते रहते हैं, परन्तु यहां उन्हें न कहनेके लिए शासन है, न पुलिस तन्त्र; अतः कोई भय भी नहीं होता ! सम्भवतः इसीलिए आज हमारा राष्ट्र ऐसी परिस्थितिमें है”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : आजतक
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