आजके दुर्जन अन्य दुर्जनके रूपमें अपना काल समय निर्मित करते हैं


कुछ दिवस पूर्व मेरी एक साधककी मित्र मण्डलीके साथ एक दुर्जन प्रवृत्तिके नेतासे भेंट हुई ! बात ही बातमें वे कहने लगे, “कलियुगमें थोडे ही ईश्वर नरसिंह भगवानके समान प्रकट होकर किसी दुष्टका वध करेंगे !” मैंने कहा, “यह आपने अच्छी बात कही है; इसलिए कलियुगमें दुर्जनोंने दुर्जन रूपी शत्रु अपने मृत्युदाताके रूपमें स्वयं जीवित रहते समय ही व्यवस्था कर ली है, जिससे ईश्वरको उन्हें मारनेके लिए कष्ट न उठाना पडे !”– तनुजा ठाकुर



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