विवाहप्रसंगमें वरपक्षसे वधूपक्षको कनिष्ठ न समझें ।


विवाहप्रसंगमें वरपक्षसे वधूपक्ष कई बार कनिष्ठ समझा जाता है । प्रत्यक्षमें यह विपरीत है । दाता श्रेष्ठ होता है । अतः कन्यादान करनेवाला वधू-पिता, वर-पितासे श्रेष्ठ होता है । लेनेवालेका हाथ भी देनेवालेके हाथसे नीचे अर्थात कनिष्ठ स्तरपर होता है । प्रत्यक्षमें दोनों पक्षोंने एक-दूसरेको समान समझना उचित होगा । – परात्पर गुरु डॉ जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था



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