नवम्बर १६, २०१८
संघकी वार्षिक ‘पथ संचलन’में लाठियोंके प्रयोगके विरुद्घ दायर एक याचिकापर महाराष्ट्रकी सत्र न्यायालयने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और महाराष्ट्र सरकारसे उत्तर मांगा है । सामाजिक कार्यकर्ता मोहनीश जीवनलालने अपनी याचिकामें भागवत और संघके दूसरे सदस्योंके विरुद्घ कार्यवाहीकी मांग की है ।
सार्वजनिक स्थानोंपर लाठियोंके प्रयोगपर ‘आर्म्स एक्ट’के अन्तर्गत कार्यवाहीकी मांग की गई है । न्यायालयने सामाजिक कार्यकर्ताकी याचिकापर सुनवाई करते हुए संघ प्रमुख भागवत और राज्य सरकारको नोटिस जारी किया है । अब इस प्रकरणकी ११ दिसम्बरको सुनवाई होगी । इससे पूर्व मोहनीश सार्वजनिक स्थानोंपर लाठियोंके प्रयोगके विरुद्ध नागपुर पुलिससे सम्पर्क कर चुके हैं ।
यद्यपि पुलिसने इसमें कोई रूचि नहीं दिखाई । बादमें वे न्यायालय गए, जहां उनकी याचिका इस आधारपर नकार कर दी गई कि वार्षिक पथ संचलनमें भागवत लाठी लेकर नहीं चलते हैं । न्यायालयसे याचिका ठुकराए जानेके पश्चात मोहनीशने सत्र न्यायालयमें याचिका प्रविष्ट की है ।
मोहनीशने कहा, ‘२८ मईको संघकी ओरसे पथ संचलनका आयोजन किया गया था । इसमें स्वयंसेवकोंने सार्वजनिक स्थानपर लाठियोंका प्रयोग किया था । इसके पश्चात मैंने जिलाधिकारी और कमिश्नरके कार्यालयमें इसकी परिवाद की ।
बादमें मैंने पुलिसकी विशेष शाखामें आरटीआई प्रविष्ट कर यह जानकारी मांगी कि क्या पथ संचलनके आयोजकोंने सार्वजनिक स्थानपर लाठीके प्रयोगको लेकर पुलिससे आज्ञा ली थी या नहीं ?’ सामाजिक कार्यकर्ताके अनुसार, आरटीआईमें यह जानकारी दी गई कि पथ संचलनके आयोजकोंको लाठियोंके प्रदर्शनकी आज्ञा नहीं दी गई थी । सार्वजनिक स्थानपर लाठीका प्रयोग या उसको साथ लेकर चलना संज्ञेय अपराध है ।
“हास्यास्पद है कि जहां प्रत्येक भारतीयको प्राचीन कालमें शस्त्र-शास्त्रका प्रशिक्षण दिया जाता था, वहीं अंग्रेजोंद्वारा भारतीय क्रान्तिकारियोंको रोकनेके लिए बनाया ‘आर्मस एक्ट’ अभी भी क्रियाशील है ? क्या क्षत्रियता अपराध है, यह तो एक गुण है ! क्या स्वरक्षण व दूसरोंके रक्षणके लिए शस्त्र संचालन (वह भी लाठी) एक अपराध है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : अमर उजाला
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