नवम्बर २६, २०१८
दिल्ली पुलिसके विशेष विभाग और जम्मू कश्मीर पुलिसके विशेष अभियान दलके संयुक्त दलके पकडे आतंकियोंने यह बताया है कि राजधानीमें विस्फोटके लिए इनका संगठन शस्त्र एकत्र कर रहा था ! साथ ही, ‘आईएसआईएस’ आतंकियोंकी भर्तीका ऑनलाइन अभियान चला रहा था । सूत्रोंके अनुसार, पुलिसके हत्थे चढा आतंकी और जामियाका छात्र जम्मू-कश्मीरके वाथूरा बुदगाम निवासी हैरिस मुश्ताक खान कुछ क्षेत्रोंका भ्रमण करनेके लिए आया भी था । वह जामियाका छात्र था तो उसे दिल्लीकी भौगोलिक स्थितिके बारेमें अच्छी जानकारी थी । इस कारण दिल्लीमें विनाश करनेके लिए संगठन प्रमुख आदिल ठोकर उसकेद्वारा ही दिल्लीसे जुडी सूचनाएं एकत्र कर रहा था ।
इतना ही नहीं, उसने कुछ संदिग्धोंको दिल्ली भेजा भी था, जिसके बारेमें विभाग जानकारी एकत्र कर रहा है । वहीं, जम्मू-कश्मीर पुलिसने समूचे नेटवर्कको खंगालनेके लिए छह अन्य संदिग्धोंको बन्दी बना लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है । माना जा रहा है कि इस नेटवर्कसे सम्बन्धित दिल्ली और पश्चिमी उत्तरप्रदेशके कुछ और लोगोंका नाम अगले कुछ दिवसमें सामने आ सकता है ।
विशेष विभागके अनुसार ‘आईएसआईएस’ इस समय ऑनलाइन भर्ती कर रहा था ! भर्तीके लिए विशेष रूपसे उन युवाओंपर उसकी दृष्टि है, जो मूलरूपसे जम्मू-कश्मीरसे हैं और वे दिल्ली और पश्चिमी उत्तरप्रदेशके किसी न किसी संस्थानसे जुडकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं । संगठनने अपने इस अभियानकेद्वारा ही जामिया मिलियाके पीजी छात्र, कश्मीरी मूलके हैरिस और ग्रेटर नोएडाके शारदा विश्वविद्यालयके कश्मीरी मूलके छात्र एहतेशाम विलालको इस साल संगठनमें सम्मिलित कर लिया था !
डीसीपीने बताया कि ‘आईएसआईएस’की भर्ती ये लोग सामाजिक जालस्थलपर (सोशियल मीडियापर) कश्मीरी मूलके छात्रोंसे मित्रता कर यह देखते थे कि किनमें आतंकियोंको लेकर सहानुभूति है ? इसके पश्चात उनसे निकटता बढाई जाती थी और तत्पश्चात उन्हें आतंकियोंके प्रति सहानु़भूति पैदा करने वाले साहित्य, वीडियो और ध्वनि सन्देश भेजे जाते थे । उनके भीतर सुरक्षाबलोंके मध्य भय फैलानेकी आग पैदा कर उन्हें संगठनसे जोड लिया जाता था !
हैरिस मूल रूपसे जम्मू कश्मीरके शाहपोरा वाथूराके बुदगामका रहने वाला है । वर्ष १९९४ में जन्म लेने वाले हैरिसने श्रीनगरके करन नगर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयसे शिक्षा आरम्भ की थी । इसके पश्चात वह दिल्लीके जामिया मिलिया इस्लामिया आ गया । यहांसे प्रशिक्षण करनेके पश्चात अन्तर्राष्ट्रीय शिक्षामें पीजीमें प्रवेश लिया था । यद्यपि, उसने शिक्षा छोड दी और आईएसआईएसमें भर्ती हो गया !
आसिफ सुहैल नदाफ जम्मू-कश्मीरके रेनावारी क्षेत्रका रहने वाला है । वर्ष १९९६ में जन्म लेने वाले आसिफ वहींके मुस्लिम स्टेडर्ड विद्यालयसे शिक्षा ग्रहण की । यद्यपि, १० वीं तक शिक्षा करनेके पश्चात उसने शिक्षा ग्रहण करना छोड दिया और एक वस्त्रोंकी दुकानमें काम करने लगा । आसिफ भी आसिफ नाजिर डारकेद्वारा ही ‘आईएसआईएस’में जुडा था ।
ताहिर अली खान जम्मू कश्मीरके ट्राल क्षेत्रके चंद्रीग्रामका निवासी है । वर्ष १९९५ में जन्म लेने वाले ताहिरने सरकारी माध्यमिक विद्यालय चंदेरगामसे शिक्षा आरम्भ की । इसके पश्चात उच्च माध्यमिक विद्यालय नोपोरा, ट्रालसे उसने १२वींकी शिक्षा प्राप्त की । इसके पश्चात उसने आगेकी शिक्षाके लिए भी प्रवेश लिया, परन्तु शिक्षा मध्यमें ही छोड दी । वह आसिफ नाजिर डारकेद्वारा ‘आईएसआईएस’में सम्मिलित हो गया ।
विशेष विभागके अनुसार, आदिल ठोकर जम्मू-कश्मीरमें ‘आईएसआईएस’का प्रमुख है । वह ‘आईएसआईएस’से जुडने वाले युवाओंको संरक्षण देता है और उनके भोजनकी व्यवस्था करते हुए उन्हें शस्त्र चलानेका प्रशिक्षण दिलवाता है । पाकिस्तानमें बैठा ‘आईएसआईएस’का एक व्यक्ति आदिलको निर्देश देता है । यह पकडे गए आतंकियोंने बताया है । उनके लक्ष्यपर इस समय दिल्ली-एनसीआर व पश्चिमी उत्तरप्रदेशके कई भाग हैं, जहां वह बडे स्तरपर विनश करना चाहता है ।
डीसीपीके अनुसार, ‘आईएसआईएस’के इस प्रारुपके आतंकी आपसमें सूचनाओंका आदान-प्रदान करनेके लिए मुख्य रूपसे ‘थेरेमा’ और ‘ट्रिलियन’ विनियोगका (एप्लीकेशनका) प्रयोग करते हैं, इस कारण सुरक्षाकर्मियोंको इनकी भनक तक नहीं लगती है !
“आतंकका बीज बालपनमें मौलानाओंद्वारा अथवा आतंक पोषित मस्जिदोंमें बोया जाता है, जिसके प्रकरण प्रायः समाचारोंमें आते रहते हैं, तत्पश्चात आतंकी उन्हें भडकानेका कार्य कर आतंकी बनाते हैं । वस्तुत: समस्त प्रकरण मौलानाओं व आतंक पोषित मस्जिदोंसे ही आरम्भ होता है; अतः शासन मूलपर प्रहार कर राष्ट्रकी सुरक्षा सुनिश्चित करें, ऐसी उनसे अपेक्षा है”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : अमर उजाला
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